अल जजीरा की फिर से भारत को बदनाम करने की साज़िश, मुस्लिमों के लिए बताया भयावह जगह

भारत को बदनाम करने की साज़िश हमेशा किसी न किसी रूप में होती रहती है और इसका सबसे ज्यादा प्रभाव वैश्विक महामारी के दौरान देखने को मिल रहा है

अब इस्लामोफोबिया के नाम पर भारत को बदनाम करने की विदेशी मीडिया लगातार कोशिश कर रहा है। पिछले कुछ समय में हमने न्यूयॉर्क टाइम्स जैसे अखबारों में इसके नमूने कई बार देखे। अब ताजा मामला अलजजीरा का है। उसने दुनिया के किसी भी देश में मुस्लिमों की बिगड़ती स्थिति को बताने के लिए भारत के नाम का इस्तेमाल उदाहरण के तौर पर किया है।

दरअसल, कल अलजजीरा में एक लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में लेखक को मुख्यत: श्रीलंका में मुस्लिमों की स्थिति पर बात करनी थी। लेकिन, लेखक उमर सुलेमान ने श्रीलंका में मुस्लिमों की गंभीर स्थिति से अपने पाठकों को अवगत कराने के लिए व अपनी बातों में वजन डालने के लिए यहाँ भारत के नाम का चुनाव किया। साथ ही लेख की हेडलाइन से लेकर लेख के आधे भाग तक वो भारत के विषय पर चर्चा में व्यस्त रहे।

लेखक ने कोरोना संकट में भारतीय मुस्लिमों की स्थिति को गंभीर बताया और मरकज का जिक्र करते हुए कहा कि भारत में हिंदू राष्ट्रवादी भारतीय जनता पार्टी और मीडिया दोनों ही मुस्लिम समुदाय को कोरोना वायरस का सुपर स्प्रेडर्स और कोरोना आतंकी बताने की कोशिश कर रहे हैं। इसके कारण मस्जिदों में जाने वालों के साथ आतंकियों की तरह बर्ताव किया जा रहा है।

उस्मान मानते हैं कि भारत में कोरोना संकट को भारतीय सरकार ने देश में इस्लामोफोबिया फैलाने के लिए इस्तेमाल किया। उनका कहना है कि भारत सरकार ने कोरोना के आगामी परिणामों से लोगों का ध्यान हटाने लिए मुस्लिमों को बलि के बकरे की तरह उपयोग किया और ऐसा करके वह भारत की बहुसंख्यक आबादी के पूर्वाग्रहों को और मजबूत करने में कामयाब रहे।

इसके बाद लेखक ने इस्लामोफोबिया के नाम पर भारतीय मुस्लिमों की स्थिति पर पूरी भूमिका बनाकर श्रीलंका के हालात पर बात की। श्रीलंका के लिए लगभग वहीं सब बातें थी।

भारत की तरह श्रीलंका पर भी यही आरोप था कि कुछ मुस्लिम कट्टरपंथियों के हमलों के कारण वहाँ मुस्लिमों का बहिष्कार हो रहा है। वहाँ के मीडिया और राष्ट्रवादी लोग मुस्लिमों को निशाना बना रहे हैं। साथ ही बहुसंख्यक आबादी मुस्लिमों से कोई भी सामान खरीदने मना कर रही है।

लेखक की शिकायत है कि अप्रैल में वहाँ की सरकार ने इस्लामिक रिवाजों के विपरीत कोरोना संक्रमित की मौत होने पर दाह संस्कार को अनिवार्य कर दिया, जिससे न केवल मुस्लिमों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ अपितु लोगों में ये संदेश भी गया कि मुस्लिमों के रिवाज के कारण कोरोना संक्रमण फैल रहा है।

उइगर और रोहिंग्याओं की तुलना भारतीय मुस्लिमों से
बात लेख में केवल श्रीलंका के मुस्लिमों तक नहीं रुकी। अंत तक आते-आते उस्मान ने इस लेख में भारतीय मुस्लिमों की स्थिति को चीन के उइगर मुस्लिमों और म्यांमार में रोहिंग्या मुस्लिमों की स्थिति से जोड़कर भी दर्शा दिया और आरोप लगाया कि इन सभी देशों में भी कोरोना संकट का इस्तेमाल मुस्लिमों पर किए अत्याचारों को छिपाने के लिए किया जा रहा है। वहाँ भी मुस्लिमों के जीवन के खतरे बढ़ते जा रहे हैं।

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