What is Hindu Dharma, Difference in Hindu and Sanatan in Hindi, indiandiary, असली घटना

ये घटना सन 1999 की है, मेरे बड़े भैया ने मालेगाँव (महाराष्ट्र) से क़रीब 20 किमी दूर एक गाँव में नमकीन और मिठाई की एक छोटी सी दुकान खोली थी। दुकान गाँव के चौक में पंचायत भवन के पास थी। भैया ने कुछ दिनों के लिए मुझे भी आने को कहा, बोले थोड़े दिन रहकर देख वैसे भी तुझे गाँव में आकर बहुत बरस हो चुके हैं। असली घटना

मैं भी कुछ दिनों के लिए गाँव चला गया, हम दोनों भाई दुकान पर सुबह से लेकर रात तक बैठते, मस्ती मज़ाक भी करते। चूँकि हम लोग शुरू से हिंदी ही बोलते थे तो दुकान पर या गाँव में भी हम हिंदी ही बोलते थे जबकि हम दोनों को ही मराठी अच्छे से आती है, हम गाँव के लोगों से भी कभी हिंदी कभी मराठी में बात करते थे।

एक दिन मैं दुकान पर बैठा था, मुझे पंचायत भवन के एक आदमी ने आकर कहा कि ये दुकान यहाँ से हटा लो वरना हम तुम्हारी दुकान हटा लेंगे। मैं कुछ पूछता इसके पहले वो बंदा निकल गया। भैया के आने के बाद उनको मैंने बताया, भैया के ससुर मालेगाँव के प्रतिष्ठित व्यक्ति थे, भैया ने उनको फोन करके इस बारे में बताया। भैया के ससुर उसी शाम गाँव आ गए और पंचायत प्रमुख से मिले।

असली घटना

कारण ये समझ आया कि चूँकि हम दोनों हिंदी में बात करते थे और भैया कई बारी पठानी सूट पहना करते थे तो गाँव के लोगों को लगा कि हम “बाहर” से आये हैं इसलिए इनको यहाँ नहीं जमने देना है। पंचायत प्रमुख भैया के ससुर से परिचित थे और सारी बात पता चलने पर वो बड़े शर्मिंदा हुए और हमको बिंदास दुकान चलाने की अनुमति दे दी साथ ही किसी तरह की परेशानी होने पर उन्हें सूचित करने को कहा। असली घटना

अपने ही देश में, केवल हिंदी बोलने के कारण एक छोटे से गाँव से हमको बाहर निकालने की तैयारियां की गई थीं। हालाँकि जब तक भैया वहाँ रहे उन पर “बाहरी” होने का ठप्पा लगता रहा और दुकान से होटल खोलने उन्हें परेशान किया गया। असली घटना

इस तरह के अनुभव अनेक मित्रों को हुए होंगे जब उन्होंने किसी और प्रदेश में या किसी नए शहर, गाँव बस्ती में कोई कारोबार शुरू किए होंगे। स्व. बाला साहेब ठाकरे ने मुंबई में अपने पैर जमाने के लिए दक्षिण भारतीयों को टारगेट किया था, उन्हीं के भतीजे राज ठाकरे ने उत्तर भारतीयों को निशाना बनाया उनके वाहन तोड़े गए, सामान फेंका और लूटा गया, जिसे हम सबने टीवी पर देखा है। दक्षिण भारत के राज्यों में हिंदी भाषियों को इस तरह परेशान किया जाता है। उत्तरप्रदेश में मायावती, मुलायम, अखिलेश के राज में अनेक हिंदुओं को गाँव, बस्ती, अपने इलाके छोड़ने पड़े हैं। यहाँ तक कि सरकारी स्कूलों को “इस्लामिक स्कूल” बना दिया गया और रविवार की बजाय शुक्रवार की छुट्टी दी जाती थी।

इसी देश में इसी देश के नागरिकों को महात्मा गाँधी और इंदिरा गाँधी की हत्या के बाद बड़ी ही निर्दयतापूर्वक मारा और लूटा गया। इसी देश के नागरिकों को एक रात कश्मीर में मस्जिदों से लाउड स्पीकर से ऐलान करके हिंदुओं को अपने घर, ज़मीन जायदाद और अपनी पत्नी, बहन, बेटी को छोड़कर जाने को कहा गया। इसी देश में अपने आराध्य रामलला की सेवा करके लौट रहे निहत्थे कारसेवकों को ज़िंदा जला दिया गया। केरल, बंगाल में आये दिन हिंदुओं की हत्या की जा रही है। बंगाल के पंचायत चुनाव किस तरह हुए ये सबने देखे हैं। असली घटना

आज संसद में, टीवी डिबेट में, अखबारों में बड़े बड़े कॉलम लिखते, “मानवता” की दुहाई देते, घड़ियाली आँसू बहाते ये तमाम नेता, पत्रकार, बुद्धिजीवी इन तमाम घटनाओं पर अपना मुँह सिलकर बैठे रहते हैं, इनको साँप सूँघ जाता है। इनके अंदर का मानव (?) केवल उसी समय जागता है जब सरकार का कोई कदम या कोई घटना जिसमें पीड़ित मुसलमान या ईसाई हो, इस देश का बहुसंख्यक, विश्व का सबसे प्राचीन धर्मावलंबी, सबसे शांत, सौम्य, सहिष्णु हिंदू इनकी आँखों में खटकता है। असली घटना

60 सालों के अपने राज में कांग्रेस ने ये किया है इस देश में, अपने ही लोगों को आपस में बाँटने, उनको लड़ाने, उनकी हत्या करने, इस देश को सिर्फ अपनी सुख सुविधाओं, लालच के लिए बर्बाद किया है। अरबों खरबों के घोटाले, अरबों खरबों के लोन बाँटने, नीतियों को कुछ खास उद्योगपतियों के हिसाब से बनाने, फेरबदल करने, सत्ता में होने पर घोटाले और सत्ता से बाहर होने पर हिंसा, झूठ, भ्रम फैलाने का काम किया है। असली घटना

विश्व के सबसे सहिष्णु हिंदू को भगवा आतंकी नाम दिया है, राम के अस्तित्व को नकारा है हिंदुओं के परम संत शंकराचार्य स्वामी दयानंद सरस्वतीजी को हत्या के झूठे मामले में गिरफ्तार किया है, साध्वी प्रज्ञाजी, असीमानंद जी, कर्नल पुरोहित को अंतहीन यातनाएं दी हैं। देश में अनेक आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की है, कश्मीर में सेना के हाथ बाँधकर कई वीर सैनिकों को शहीद करवाया है, अपंग बनाया है। असली घटना

अपने देश के लोगों विशेषकर हिंदुओं से शत्रुता रखने वाले, बांग्लादेशियों, रोहिंग्याओं के लिए प्रेम रखने वाले, उनके आधार कार्ड, वोटर कार्ड बनाने वाले, उनके अपराधों पर चुप्पी साधने वाले इन दोगलों को पहचानिए, इनके चेहरे याद रखिये, इनको सबक सिखाईये। असली घटना

ये तय है अगर केंद्र में नरेंद्र मोदी नहीं होते तो इतना सब हो रहा है इसकी किसी को कानोंकान ख़बर तक नहीं होती। एक एक करके ये केकड़े बिलों से बाहर आते जा रहे हैं, इनकी छटपटाहट बताती है कि ये बहुत तकलीफ में हैं और इनकी ये तकलीफ बनी रहना चाहिए और बढ़ती रहना चाहिए।

Harshal Khairnar

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