Azad-Hind-Fauj, गुमनाम परवाने, indiandiary

आजादी के एक गुमनाम परवाने की कहानी…… आजाद हिन्द फ़ौज:-

 

 

नेताजी आजाद हिन्द फ़ौज का गठन कर चुके थे और नवयुवको की भर्ती प्रक्रिया चल रही थी।
नेता जी की सख्त हिदायत थी की किसी ऐसे युवक को भर्ती न किया जाए जो अपने माँ बाप का अकेला हो। भर्ती की प्रक्रिया उनके एक कुशल मित्र देख रहे थे जिनका नाम अभी विस्मरित हो रहा है। गुमनाम परवाने

एक दिन एक नवजवान भर्ती के कैम्प में आया। उन्नत ललाट चौड़ा सीना उन्मुक्त कंधे आँखो में राष्ट्रभक्ति की हिलोरें और मनोदशा से स्वाधीनता हेतु स्वयं के समर्पण को उद्यत। वाह वाह कर उठे सभी पर शीघ्र ही सबका जोश ठंडा पड़ गया जब उसने पूछने पर बताया की उसके घर में सिर्फ उसकी एक बूढी माँ है।
लाख अनुनय के बाद भी अधिकारी नेताजी के आदेश की अवहेलना न कर सके। भारी कदमो से वो लौट गया।

गुमनाम परवाने

 

रात में पूर्ण दृष्टान्त उस चयनकर्ता ने यथावत नेताजी से कह सुनाया।
अगले दिन सुबह नेताजी स्वयं मौजूद थे कैम्प में की अचानक वही युवक फिर आ धमका।
पहचानने के बाद नेताजी ने उसे नियमो का हवाला देते हुए दुबारा आने का कारण पूछा तो उसने अश्रुपूर्ण शब्दों में बताया की कैसे वो कल जब घर वापस गया तो माँ को पूछने पर बताया की उसका चयन इसलिए नहीं हो सका क्योंकि नेताजी को लगता है की उसे अपनी बूढी माँ की सेवा करनी चाहिए और फिर माँ ने उससे कहा की बेटा तू खाना खा के सो जा कल नेताजी अवश्य तुझे रख लेंगे अपनी सेना में।

गुमनाम परवाने

 

और उसी रात में माँ ने घर के पास वाले कुएं में छलांग लगा कर ख़ुदकुशी कर ली, इस उम्मीद में की अब नेताजी की शर्त से उसका बेटा स्वतंत्र होगा।
नेता जी उसकी बाते सुनकर भाव विव्हल हो उठे और बोले जिस की सेना में भर्ती की शुरुआत ही एक माँ की कुर्बानी से होगी वो एक दिन आजादी की लड़ाई में अपना इतिहास लिखेगा। उनका विशवास गलत न था। ट्रेनिंग के सभी पायदानों में टॉप करते हुए वो शीघ्र ही आजाद हिन्द फ़ौज़ की एयरविंग का प्रमुख बन गया।

गुमनाम परवाने

 

एक दिन नेताजी को खबर मिली की ब्रिटेन से जलमार्ग से पनडुब्बी में इतना गोला बारूद और हथियार भारत लाया जारहा जिसके बाद अंग्रेज़ो की शक्ति 50गुनी बढ़ जाती। चिंतित नेताजी विंग कमांडर और एक अन्य विश्वास पात्र के साथ हेलीकॉप्टर से पनडुब्बी देखने निकल गए। ठीक उसके ऊपर जाकर देखा तो सिर्फ एक 18 फुट व्यास की चिमनी दिखाई दे रही थी बाकी पनडुब्बी जल के अंदर थी। नेताजी असमान्य हो उठे तो उस एयरविंग के कमांडर ने कहा की हमारे पास एक अतिविस्फोटक बम है कहिये तो मार दें तो नेताजी ने कहा यदि निशाना चूक गया तो वो सतर्क हो जाएंगे और हम पर हमला भी कर सकते हैं। युवक ने एक पल को सोचा फिर वो बम उठाया और नेताजी को कहा वो देखिये वहां एक और पनडुब्बी है और इधर बम लेकर सीधा चिमनी में कूद गया। कुछ क्षण को पूरा समुद्र लाल हो उठा।

गुमनाम परवाने

 

नेताजी का कथन आज सत्य हुआ था। उस एक की कुर्बानी से अंग्रेज़ कमजोर हो गए।
अफ़सोस ऐसे शहीदों का नाम इतिहास के पन्नों में कही धुंधला सा पड गया।

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