एनसीपी विधायकों पर लग सकता हैं दल बदल कानून , जाने

एनसीपी विधायकों पर लग सकता हैं दल बदल कानून , जाने
एनसीपी विधायकों पर लग सकता हैं दल बदल कानून , जाने

महाराष्ट्र में घटनाक्रम बहुत ही तेजी से बदल रहा हैं। सुबह भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है। इसके साथ ही महाराष्ट्र में राजनीतिक बवंडर मचा हुआ है। लेकिन एनसीपी अध्यक्ष शरद ने सुबह साफ कर दिया कि बीजेपी के साथ जाना अजित पवार का निजी फैसला है। आपको बता दें कि  पार्टी विधायक उनके साथ हैं। इतना ही नहीं उन्होंने भाजपा सरकार का समर्थन करने वाले अजीत पवार व अन्य विधायकों को दलबदल विरोधी कानून का सामना करने की भी चेतावनी दी है। आपको बताते है कि क्या कहता है ये कानून — एनसीपी विधायकों एनसीपी विधायकों 

आखिर क्या होता है दलबदल कानून 

इस शब्द का सीधा मतलब है एक पार्टी से दूसरी पार्टी में जाना। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 60 दशक में कई ऐसे मामले देखने को मिले कि जब कई विधायकों ने एक ही दिन में 2 -2 पार्टी बदल दी, हद तो तब हो गई जब हरियाणा के एक विधायक गया लाल ने एक ही दिन में दो बार और 15 दिन में तीन बार दल बदल दिया। उन्होंने 15 दिन में कांग्रेस और जनता दल दो-दो चक्कर लगा दिए थे। इस राजनीतिक उछलकूद पर लगाम लगाने के लिए एक मार्च 1985 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ये कानून लागू कर दिया।

क्या होता हैं विधायकों की अयोग्यता का आधार

  1. किसी दल के विधायक का एक पार्टी से चुनाव लड़ना और जीतने के बाद दूसरी पार्टी में शामिल हो जाना।
  2. अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर सदन में वोट करना या नीति विरुद्ध योगदान करना।
  3. चुनाव के बाद अपनी पार्टी छोड़ कर निर्दलीय रहना ।
  4. दलबदल तब माना जाता है, जब किसी दल का सांसद या विधायक अपनी मर्जी से पार्टी छोड़ता है या पार्टी व्हिप की अव्हेलना करता है।
  5. दलबदल साबित होने पर संबंधित सांसद या विधायकों की सदस्यता समाप्त की जा सकती है। साथ ही दलबदल कानून के तहत कार्रवाई भी हो सकती है।

कब लागू नहीं होता कानून 

  1. किसी विधायक या सांसद को पार्टी से निकाले जाने पर उसकी सदस्यता खत्म नहीं होती।
  2. पार्टी से निकाला जाना दलबदल कानून के अंतर्गत नहीं आता है।
  3. यदि किसी पार्टी के दो तिहाई विधायक या सांसद एक साथ पार्टी छोड़ दें तो भी ये कानून लागू नहीं होता है।
  4. पहले एक साथ पार्टी छोड़ने वाले सदस्यों की संख्या एक तिहाई ही निर्धारित थी।
  5. पार्टी से अलग होने वाले दो तिहाई सदस्य अलग दल नहीं बना सकते। उन्हें किसी दूसरे दल में ही शामिल होना होगा

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