बिहार में गौ हत्या पर फिर बवाल, गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला, हर दिन 3, जुमे के दिन 20 गोहत्या

गोमाँस

गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला

गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला

गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला गोमाँस के खिलाफ उठाई आवाज तो अफरोज पर गैंग का हमला

भारत में गोमाँस व्यापार के क्षेत्र में अधिकतर मुस्लिम समुदाय का ही बोलबाला रहा है, इसीलिए इससे सम्बंधित किसी भी मुद्दे का राजनीतिकरण ज़रूर किया जाता है। जब भी गोहत्या वाले अवैध बूचड़खानों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की जाती है, वामपंथी मीडिया इसे लेकर हो-हल्ला मचाने लगता है और इस क़दम को मुस्लिम समुदाय के ख़िलाफ़ बताता है।

2017 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की थी कि राज्य में सारे अवैध बूचड़खाने बंद किए जाएँगे। योगी सरकार के इस क़दम का ख़ूब विरोध हुआ। एक मुस्लिम नेता ने तो इसे मुस्लिमों के ख़िलाफ़ अत्याधिक अत्याचार कह कर सम्बोधित किया। हालाँकि, अब तक कोई और राज्य इस तरह का फ़ैसला नहीं ले सका है।

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने भी योगी सरकार के उस फ़ैसले का स्वागत किया था लेकिन वामपंथी मीडिया ने ये सब दिखाने से इनकार कर दिया। ये जानने लायक बात है कि जहाँ भी ये बूचड़खाने होते हैं, आसपास रहने वाले लोग इससे नफरत करते हैं।

ऐसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों, यहाँ तक कि मुस्लिमों ने भी कहा है कि इससे पर्यावरण और उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है। अब एक नया मामला आया है, जिससे आपको पता चलेगा कैसे इन बूचड़खानों का विरोध करने वाले मुसलमानों को न तो मीडिया और न ही प्रशासन से कोई मदद मिल पाती है। बिहार स्थित पश्चिम चम्पारण के बेतिया में मुसलमानों ने अपने इलाक़े के एक बूचड़खाने के विरुद्ध पुलिस से शिकायत की है लेकिन उनके कानों में जू तक न रेंगी।

‘स्वराज्य मैग’ में प्रकाशित स्वाति गोयल शर्मा की एक ख़बर के अनुसार, बेतिया की एक आवासीय कॉलोनी के मुसलमान पिछले 5 वर्षों से अपने एरिया में चल रहे गोहत्या और गोमाँस के अवैध व्यापार के बारे में पुलिस को लिख रहे हैं लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मोहम्मद अफ़रोज़ ख़ान को तो उन अवैध व्यापारियों ने मारा-पीटा भी। अफरोज ने बताया है कि गोहत्या करने वाले कसाइयों ने उनकी हत्या का प्रयास किया। फ़िलहाल उनका इलाज चल रहा है।

मई 14, 2020 को रात 10 बजे हुए इस हमले को लेकर अफरोज ने पुलिस को भी लिखित शिकायत दी है। अफरोज के भाई अख़लाक़ ने बताया कि वो अभी कमजोर हैं, हॉस्पिटल में हैं और बात करने में सक्षम नहीं हैं। अफरोज का सिटी-स्कैन भी हुआ है।

अफरोज ने पुलिस को बताया है कि जब उनका गोहत्या करने वाले समूह से आमना-सामना हुआ तो, पप्पू नामक आरोपित ने सोहैल उर्फ़ ‘टमाटर’ को चाकू देकर कहा- ‘इसे मार डालो।‘ इसके बाद सोहैल ने अफरोज के सिर पर वार किया।

जब अफरोज की पत्नी हाजरा खातून अपने पति को बचाने आईं तो आरोपितों ने उन्हें निर्वस्त्र करने की कोशिश की और उनके साथ अश्लील हरकतें की। उनकी सोने की चेन और कान की रिंग भी लूट ली गई। जैसे ही कुछ पड़ोसी वहाँ जमा हुए, हमलावर भाग खड़े हुए।

यहाँ गायों की हत्या और गोमाँस के अवैध व्यापार को लेकर कई बार सांप्रदायिक तनाव भी भड़क चुका है। इस घटना के बाद उस एरिया के 23 लोगों ने पश्चिम चम्पारण पुलिस को एक आवेदन दिया है। इस पत्र का विषय है- “गोहत्या और गोमाँस के अवैध व्यापार के सम्बन्ध में, जिसके कारण यहाँ सांप्रदायिक तनाव भड़कने की आशंका है।“

इस पर हस्ताक्षर करने वाले लोग वार्ड 12-13 में स्थित कालीबाग मोहल्ले के स्थायी निवासी हैं। उन्होंने बताया है कि एक संदिग्ध समूह इलाके में गोहत्या करता है और गायों के ख़ून, माँस और अन्य चीजों को नालियों में फेंक देता है। हड्डियों को भी यूँ ही फेंक दिया जाता है।

मोहल्ले वालों को इससे ख़ासी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है। मोहल्ले में गैस सिलिंडर देने वाले वेंडर नहीं आते। यहाँ तक कि अख़बार वाले, रिक्शा वाले, बिजली मिस्त्री या कोई सरकारी कर्मचारी तक यहाँ नहीं आते।

लोगों ने बताया है कि इस कारण उनके घर की बहू-बेटियों को स्कूल या हॉस्पिटल जाने में काफ़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बताया गया है कि यहाँ हिन्दू समाज के भी लोग हैं, जो परेशान हैं। पत्र में लोगों ने लिखा है:

“इस सम्बन्ध में समाज के बुद्धिजीवियों ने कई बार पंचायती की लेकिन ये लोग उसे भी मानने को तैयार नहीं हैं। वो लोग कहते हैं कि उन लोगों की साँठगाँठ प्रशासन से है और कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। जब हम गोहत्या का विरोध करते हैं तो वो सब हथियार लेकर इकट्ठे हो जाते हैं और शराब पीकर हमें गन्दी-गन्दी गालियाँ देते हैं। वो कहते हैं कि जो बोलेगा, उसे वो जान से मार देंगे। हमारे मोहल्ले का सुख-चैन गायब हो गया है। इस मामले में जाँच के बाद उन लोगों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई की जाए।”

मोहल्ले वालों के पास कई तस्वीरें भी हैं, जिनमें गोहत्या के बाद गोमाँस, हड्डियाँ और ख़ून इधर-उधर फेंकी हुई दिख रही हैं। एक तस्वीर में तो तुरंत हत्या की गई गाय दिख रही है।

अख़लाक़ का कहना है कि वहाँ के लोग एक साफ़-सुथरा वातावरण चाहते हैं लेकिन पुलिस आती भी है तो ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने बताया कि रोज कम से कम 3 गायों को मार डाला जाता है। जुमे के दिन तो ये आँकड़ा 20 भी हो जाता है।

अख़लाक़ ने बताया कि सैकड़ों की संख्या में लोग गोमाँस खरीदने के लिए जमा होते हैं। रोज इसी तरह लॉकडाउन को भी धता बताया जाता है। एक गाय को मारने (गोहत्या) से उनके पास 7000 रुपए तक आते हैं। इससे आप सोच सकते हैं, उनके पास कितने पैसे हैं।

बकौल अख़लाक़, एक गाय को मारने (गोहत्या) के बाद लगभग तीन बाल्टी भर कर ख़ून निकलता है, जिसे वो सड़कों पर और नालियों में फेंक देते हैं। गोहत्या से परेशान उसी मोहल्ले के अख्तर का कहना है कि वो लोग नरक में रह रहे हैं, उनकी बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुँचाई जाए।

यह भी जरूर पढे :

फेक न्यूज फैलाओ ,मोदी को हराओ , द प्रिन्ट के पत्रकार के लेख से खुली द प्रिन्ट की पोल

Comments

comments