आज़ादी की लड़ाई का सच- चंद्रशेखर आज़ाद की मौत व राष्ट्रभक्ति (असली राज)

चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में, chandrashekhar azad indiandiary, चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत के बारे में वो बात जो आपको सोचने पर मजबूर कर देगी?

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में, chandrashekhar azad indiandiary               क्या नेहरु ने चंद्रशेखर आज़ाद जी को अंग्रेजों के जाल में फंसाने में मदद की थी? जिस आज़ाद को अंग्रेज़ पूरी ताकत लगाकर भी नहीं ढूंढ नहीं पा रहे थे आखिर ऐसा क्या हुआ कि आज़ाद जी नेहरु से मिलने के कुछ देर बाद उनके ठिकाने की सटीक जानकारी अंग्रेजों को हो गयी.

इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आप एक ब्यक्ति को फ्रीडम फाइटर्स की लिस्ट से निकाल देंगे. असल में जो भारत के सपूत जिन्होंने इंडिया के लिए संघर्ष किया उन्होंने इसका कभी भी क्रेडिट नहीं लिया. उनका नाम इतिहास में आपको नहीं मिलेगा या फिर किसी रेयर डॉक्यूमेंट में मिलेगा जो की मेनस्ट्रीम से हटा लिया गया है… मित्रो इन सब क्रांतिकारियों के परिवार भी थे , क्या हुआ उनके परिवार के साथ ? सरदार पटेल की पत्नी को एक चश्मा तक नहीं दे पायी भारतीय सरकार, आखिर क्यों? चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

 

आज़ादी की लड़ाई का सच-गाँधी, भगत सिंह व चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में:-

अगर आप ध्यान देंगे तो आप पाएंगे की कुछ ऐसे क्रन्तिकारी थे जिसे मिलते ही अंग्रेजो ने मौत की सज़ा दे दी और कुछ को उन्होंने जेल में तो डाला लेकिन उनके ऊपर एक लाठी तक नहीं पड़ी. आखिर गाँधी और नेहरु को ऐसा कौन सा प्रोटेक्शन प्राप्त था कि ये कई बार जेल गए पर इन्हें कोई शारीरिक यातना तक नहीं मिली उल्टे इन्हें खातिरदारी के साथ रखा गया. नेहरु ने तो जेल में किताब तक लिख डाली इससे आप समझ सकते हैं की इन्हें जेल में डाला गया सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए जबकि इनके लिए तो ये एक आरामगाह से ज्यादा कुछ और नहीं था.

 

        भारत ओर जल्दी आज़ाद हो सकता था क्यूंकि जब भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु जैसे क्रन्तिकारी जब आज़ादी की लड़ाई लड़ रहे थे, लोग बहोत तेज़ी से उनके साथ जुड़ रहे थे क्यूंकि अब लोगों ने जुर्म को सहने से मना कर दिया था या फिर शायद उन्हें अच्छी तरह आभास हो गया था कि ये जुल्म जो उनके और उनकी बहन बेटियों के साथ लगातार किया जा रहा था उसका कोई अंत नहीं था और अब वे करने या मरने की बात कर रहे थे जो की अच्छा भी था. अंग्रेजों की संख्या इतनी कभी नहीं थी कि वो भारत जैसे बड़े देश को कंट्रोल कर पाते तो उन्होंने फूट डालो और राज करो अपनाया. यहीं के कुछ शक्तिशाली लोगों को उन्होंने अधिकार दिया की वो भी लूटपाट कर सकते थे उनके एरिया में, वो एक तरह से अपने एरिया के वो क्रूर राजा थे जो लोगों पर बिना किसी जवाबदेही के कोई भी जुल्म करने के लिए स्वतंत्र थे.

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

 

 

bhagat singh indiandiary

इससे लोगों पर दोहरा अत्याचार हुआ, कुछ गोरो द्वारा और कुछ यहाँ के जमीदारों द्वारा. जब जब क्रांति ने एक बड़ा रूप लिया गाँधी द्वारा अहिंसा के नाम पर लोगों को बेवकूफ बनाया गया और फिर उन्हें बड़ी चालाकी से रौंदा गया ताकि कोई और ना उठ खड़ा होने की हिम्मत कर सके. बड़ा आश्चर्य होता है जब लोग कहते हैं की गाँधी ने आज़ादी दिलाई बिना खड्ग बिना ढाल, ऐसा लगता है ये उन सभी लोगों पर एक तमाचा हैं जिन्होंने देश को आज़ाद करने में अपनी जान दी और जिनकी बहन बेटियों ने वो जलालत सही जिसे सोचके कोई सिहर जायेगा.

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

 

parants of bahagat singh

          गाँधी की वजह से हमें आजादी नहीं मिली बल्कि गाँधी की वजह से देश लेट आज़ाद हो पाया क्यूंकि गाँधी ने हमेशा क्रांति की धार को कुंद ही किया. सच तो ये है हमें बचपन से ही गलत कहानियां पढाई गयी और हमारे जेहन में हमेशा से बिठाया गया कि गाँधी शब्द कितना बड़ा है जैसे नए भारत की उत्पत्ति ही इसी शब्द से हुई हो. और तो और इस गरिमामई जादुई शब्द को कांग्रेस की पीढ़ी ने कब अपने नाम के पीछे जोड़ लिया किसी को इसका आभाष तक ना हो पाया. देश को बांटने की राजनीती कांग्रेस द्वारा हमेशा से की जाती रही है क्यूंकि चाणक्य जी ने कहा था कि फिरंगी संतान अभी भी देशप्रेम नहीं कर सकती. उनके लिए हमेशा राजनीती एक बिज़नेस ही रहेगी जिससे जितना पैसा बन पायेगा वो बनाएंगे. कांग्रेस असल में अंग्रेजों की ही पार्टी थी और इसका नाम भी उन्हीं की देंन है. आजादी के बाद तक अंग्रेजों का यहाँ दबदबा था वरना नेहरु सिर्फ एक वोट मिलने के बावजूद कभी प्रधानमंत्री नहीं बन सकते थे.

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत ( असली राज ):-

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत से जुडी फ़ाइल आज भी…  लखनऊ के सीआइडी ऑफिस १- गोखले मार्ग मे रखी है…. उस फ़ाइल को नेहरु ने सार्वजनिक करने से मना कर दिया था….. इतना ही नही नेहरु ने यूपी के प्रथम मुख्यमंत्री गोविन्द बल्लभ पन्त… को उस फ़ाइल को नष्ट करने का आदेश दिया था .. लेकिन चूँकि पन्त जी खुदएक…  महान क्रांतिकारी रहे थे,  इसलिए उन्होंने नेहरु को झूठी सुचना दी कि उस फ़ाइल.. को नष्ट कर दिया गया है ..!!

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

 

क्या है.. उस फ़ाइल मे?

उस फ़ाइल मे इलाहबाद के तत्कालीन…. पुलिस सुपरिटेंडेंट मिस्टर नॉट वावर के बयान दर्ज है, जिसने अगुवाई मे ही पुलिस ने अल्फ्रेड पार्क मे बैठे आजाद को घेर लिया था…. और एक भीषण गोलीबारी के बाद वहां आज़ाद शहीद हुए |

चूँकि भारत की आज़ादी के लिए लड़ने वाले चंद्रशेखर आज़ाद ब्रिटिश पुलिस की हिटलिस्ट में थे और काकोरी कांड तथा उसके बाद 1929 में बम कांड के बाद पुलिस आज़ाद को ढूंढ रही थी।
नॉट वावर ने अपने बयान मे कहा है कि “ मै खाना खा रहा था… तभी नेहरु का एक संदेशवाहक आया उसने कहा कि नेहरु जी ने एक संदेश दिया है… कि आपका शिकार अल्फ्रेड पार्क मे है और तीन बजे तक रहेगा…. मै कुछ समझा नही फिर मैं तुरंत आनंद भवन भागा और नेहरु ने बताया कि अभी आज़ाद अपने साथियो के साथ आया था, वो रूस भागने के लिए बारह सौ रूपये मांग रहा था…. मैंने उसे अल्फ्रेड पार्क मे बैठने को कहा है “फिर मै बिना देरी किये पुलिस बल लेकर… अल्फ्रेड पार्क को चारो ओर घेर लिया और आजाद को आत्मसमर्पण करने को कहा…. लेकिन उसने अपना माउजर निकालकर हमारे एक इंस्पेक्टर को मार दिया…. फिर मैंने भी गोली चलाने का हुकम दिया…. पांच गोली से आजाद ने हमारे पांच लोगो को मारा फिर छठी गोली… अपने कनपटी पर मार दी |”

इलाहाबाद संग्रहालय से जो जानकारी मिलती है…. उसके मुताबिक़ 27 फ़रवरी 1931 को जब एल्फ़्रेड पार्क में चंद्रशेखर आज़ाद, जामुन के पेड़ के नीचे…. एक साथी के साथ कुछ बातचीत कर रहे थे, तभी एक मुखबिर की सूचना पर डिप्टी एसपी ठाकुर विश्ववेश्वर सिंह…. और पुलिस अधीक्षक सर जॉन नॉट बावर ने पूरे पार्क को घेर लिया था।

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

 

आजाद नेहरु से मिलने क्यों गए थे ? इसके दो कारण है:-

१- भगत सिंह की फांसी की सजा माफ़ करवाना
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
महान क्रान्तिकारी “चन्द्रशेखर आजाद” जिनके नाम से ही अंग्रेज अफसरों की पेंट गीली हो जाती थी, उन्हें मरवाने में किसका हाथ था? 27 फरवरी 1931 को क्रान्तिकारी चन्द्रशेखर आजाद की मौत हुयी थी । इस दिन सुबह आजाद नेहरु से आनंद भवन में उनसे भगत सिंह की फांसी की सजा को उम्र केद में बदलवाने के लिए मिलने गये थे, क्योंकि वायसराय लार्ड इरविन (गवर्नर जनरल-तत्कालीन) से नेहरु के अच्छे ”सम्बन्ध” थे, पर नेहरु ने आजाद की बात नही मानी, … दोनों में आपस में तीखी बहस हुयी, और नेहरु ने तुरंत आजाद को आनंद भवन से…  निकल जाने को कहा ।

चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में, chandrashekhar azad indiandiary             आनंद भवन से निकल कर…. आजाद सीधे अपनी साइकिल से अल्फ्रेड पार्क गये । इसी पार्क में नाट बाबर के साथ मुठभेड़ में… वो शहीद हुए थे । अब आप अंदाजा लगा लीजिये की उनकी मुखबरी किसने की? आजाद के लाहोर में होने की जानकारी… सिर्फ नेहरु को थी। अंग्रेजो को उनके बारे में जानकारी.. किसने दी? जिसे अंग्रेज शासन इतने सालो तक… पकड़ नही सका,तलाश नही सका था, उसे अंग्रेजो ने 40 मिनट में तलाश कर, अल्फ्रेड पार्क में घेर लिया । वो भी पूरी पुलिस फ़ोर्स और तेयारी के साथ ?… अब आप ही सोच ले की गद्दार कोन हें ?

चंद्रशेखर आज़ाद की मौत

 

२- लड़ाई को आगे जारी रखने के लिए रूस जाकर स्टालिन की मदद लेने की योजना
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
आज़ाद पहले कानपुर गणेश शंकर विद्यार्थी जी के पास गए फिर वहाँ तय हुआ की स्टालिन की मदद ली जाये क्योकि स्टालिन ने खुद ही आजाद को रूस बुलाया था …..  सभी साथियो को रूस जाने के लिए बारह सौ रूपये की जरूरत थी…..जो उनके पास नही था इसलिए आजाद ने प्रस्ताव रखा कि क्यों न नेहरु से पैसे माँगा जाये…. लेकिन इस प्रस्ताव का सभी ने विरोध किया !

फिर आज़ाद अकेले ही कानपुर से इलाहबाद रवाना हो गए और आनंद भवन गए… उनको सामने देखकर नेहरु चौक गये |उसके बाड़ जो हुआ वह आप उपर पढ़ चुके हैं !!

एकबात ओर: चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 और मृत्यु : 27 फरवरी 1931, सच को शेयर करना न भूलें !!

Read More:-

Facts about Sanatana Dharma, Geeta Shlok, Ramayan & Devi Devta

Ashok Maurya, अहिंसक बौद्ध बनना हिन्दुत्व की धार कुंद कर गया

Shivling truth in Hindi:- शिवलिंग को गुप्तांग की संज्ञा कैसे दी?

चंद्रशेखर आज़ाद के बारे में

Comments

comments