खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी, पढे रोचक तथ्य

खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी, पढे रोचक तथ्य
खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी, पढे रोचक तथ्य

जब हम छोटे थे तब से सुनते आ रहे है कि‘चमक उठी सन सत्तावन में, वह तलवार पुरानी थी…खूब लड़ी मर्दानी, वह तो झांसी वाली रानी थी’ कवियत्री सुभद्रा कुमारी चौहान द्वारा रचित यह रचना हमारे जेहन में झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की एक छवि सहसा ही बना देती है।भारत के पहले आजादी की लड़ाई में उन्होंने मात्र 23 वर्ष की उम्र में शहीदी दी। उन्होंने कई वीरों को प्रेरणा दी , वो जब तक जिंदा रही अंग्रेज झांसी की तरफ देख भी न सके। आज उनके जन्मदिवस पर पढिए उनके रोचक तथ्य – झांसी वाली रानी 

  1. रानी लक्ष्मी बाई का जन्म 19 नवंबर 1835 को वाराणसी (उ.प्र.) के भदैनी नामक नगर में हुआ था। हालांकि, उनके जन्म को लेकर मतभेद है। रानी लक्ष्मी बाई का आज जन्मदिन हो या न हो, लेकिन वे हमेशा भारतवासियों के लिए नमनीय है
    महारानी लक्ष्मीबाई का जन्म उ.प्र. के भदैनी नगर में हुआ था। उनका बचपन का नाम मणिकर्णिका था, लेकिन लोग उन्हें प्यार से मनु कहकर बुलाया करते थे।
  2. जब मनु चार साल की थीं, तब उनकी मां भागीरथीबाई का देहांत हो गया था। उनके पिता उन्हें बाजीराव के दरबार में ले गए। मनु का स्वाभाव इतना मोहक था कि उन्होंने दरबार में सभी का मन मोह लिया और उन्हें एक नाम और दिया ‘छबीली’।
  3. 1842 में मनु का विवाह झांसी के मराठा शासक राजा गंगाधर राव निम्बालकर के साथ हुआ। विवाह के बाद मणिकर्णिका, मनु या छबीली को नया नाम मिला ‘लक्ष्मीबाई’।
  4. विवाह पश्चात उन्होंने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन वह चार माह बाद ही चल बसा। चूंकि गंगाधर राव का स्वास्थय भी ठीक नहीं था, इसलिए उन्होंने रानी को एक बेटा गोद लेने की सलाह दी। उन्होंने ऐसा ही किया और अपने गोद लिए बेटे का नाम दामोदर राव रखा।
  5. अंग्रेजों ने अपनी ‘राज्य हड़प नीति’ का पालन करते हुए दामोदर राव को झांसी का उत्तराधिकारी मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद रानी ने लंदन की अदालत में मुकदमा भी लड़ा, लेकिन बहस के मुकदमा ख़ारिज कर दिया गया।
  6. मुकदमा हारते ही अंग्रेजों ने झांसी के किले पर कब्जा कर लिया और रानी को झांसी के ही रानी महल में शरण लेनी पड़ी। वहां से उन्होंने एक स्वयंसेवक संगठन बनाना शुरू किया, जिसमें सिर्फ महिलाओं की भर्ती की।
  7. कहते हैं कि जहां रानी लक्ष्मी बाई का सुंदरता, चालाकी और वीरता में कोई तोड़ नहीं था, वहीं वे उस समय के विद्रोही नेताओं में सबसे ज्यादा खतरनाक भी थीं।
  8. रानी लक्ष्मीबाई के इस संगठन में एक उनकी हमशक्ल भी थी। इस हमशक्ल का नाम था झलकारी बाई। झलकारी बाई को रानी ने अपने संगठन में प्रमुख स्थान दिया।
  9. रानी लक्ष्मी बाई 23 साल कि उम्र में शहीदो गई थी

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