indian politics, देश के चूहे

देश के चूहे, इन चूहों ने देश को हर तरह से खोखला कर दिया:-

                      इंदौर का एम वाय अस्पताल (महाराजा यशवंतराव होल्कर चिकित्सालय) संभवतया मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है। मेरे पिताजी इसी अस्पताल में नौकरी करते थे। बीमार पड़ने पर परिवार का, रिश्तरदारों का इलाज इसी अस्पताल में होता था।

पिताजी का दफ़्तर अस्तपाल के बेसमेंट में था और थोड़ी ही दूरी पर मुर्दाघर भी था। मुझे अक्सर जिज्ञासा रहती थी मुर्दाघर देखने की क्योंकि पापा और उनके साथी कर्मचारी अक्सर बताते थे कि एम वाय के मुर्दाघर में चूहे इतने बड़े साइज के हैं कि इंसान देखकर ही डर जाए और उसे विश्वास ही नहीं हो कि ये चूहे हैं क्योंकि इंसानी माँस खा खाकर वो चूहे इतने विशाल और हष्ट पुष्ट हो चुके थे कि कई बार ज़िंदा इंसानों पर भी हमला कर देते थे।

देश के चूहे

 

आखिरकार एक दिन मौक़ा हाथ लगा और एक कर्मचारी को पटाकर मैं मुर्दाघर में चला गया। उस वक़्त मैं 9 वीं कक्षा में था। मुर्दाघर के पास पहुँचते पहुँचते दिल ज़ोरों से धड़कने लगा था और घबराहट भी होने लगी थी, बदबू ज़ोरों की आने लगी थी। मुँह पर रुमाल रखकर हम लोग अंदर घुसे, एक पोस्टमॉर्टम चल रहा था, कर्मचारी साथ था तो अंदर आने दिया लेकिन अंदर का दृश्य देखकर सारी हिम्मत और उत्साह की हवा निकल गई, तभी 3-4 विशालकाय चूहे दिखाई दिए और मैं तेजी से बाहर की ओर भागा। भागते भागते सीधा पापा के दफ़्तर में आकर रुका और तब तक पापा को पता चल चुका था कि मैं दुलीचंद के साथ मुर्दाघर गया हूँ। पापा कुछ बोले नहीं बस इतना पूछा कि डर तो नहीं लग रहा। मेरे मुँह से कुछ बोल ही नहीं फूट रहे थे। एक कर्मचारी ने पानी पिलाया।

तभी दुलीचंद भी आ गया और पापा ने उसकी ऐसी जमकर क्लास ली कि दुलीचंद की घिग्गी बँध गई, बोले ये तो बच्चा है तेरे में तो अकल है क्यों ले गया तू इसको वहाँ, अगर इंफेक्शन हो जाय, या चूहे हमला कर देते तो इसकी जान भी जा सकती थी। बेचारा दुलीचंद चुपचाप सुनता रहा और पापा से माफ़ी माँगता रहा।

इस घटना के कई दिनों तक मैं सो नहीं पाया बार बार मुर्दाघर का भयानक दृश्य और वो हट्टे कट्टे चूहे मुझे दिखाई देते थे। एम वाय के इन विशालकाय चूहों से पूरा अस्पताल ख़ौफ़ज़दा रहता था क्योंकि चूहे मुर्दाघर से निकलकर सात मंजिला विशालकाय अस्पताल में फैल चुके थे। कर्मचारियों, डॉक्टरों, मरीज़ों और उनके साथ रहने वाले कई लोगों पर ये चूहे हमला कर चुके थे। इनको मारने के कई असफल प्रयास किये जा चुके थे।

देश के चूहे

 

फिर 1994 में सूरत में प्लेग फैला और कई लोगों की उसमें मौत हो गई और प्लेग का कारण चूहे ही थे। लोग सूरत छोड़कर भागने लगे। इसी दौरान एम वाय प्रशासन ने भी इन चूहों से दो दो हाथ करने की ठानी और पूरे अस्पताल को खाली कराकर बड़े पैमाने पर पेस्ट कंट्रोल करवाकर चूहों को मारने की कार्रवाई शुरू की गई। इतनी भारी संख्या में और इतने विशालकाय चूहे मारे गए कि वो रोज़ अखबार की सुर्खियों में बने रहते थे.. ख़ैर आखिरकार एम वाय चूहा मुक्त हुआ और लोगों ने राहत की साँस ली।

इसी तरह आज़ादी के बाद से एक ही परिवार और पार्टी के लोगों ने इस देश पर लंबे समय तक राज़ किया, इस देश की संपत्ति को लूटा, हर विभाग, हर सिस्टम, हर तरफ भ्रष्टाचार के इतने सारे बिल और इतने सारे चूहे पैदा किये जो कि पैसा खा खाकर बहुत मुस्टंडे, हट्टे कट्टे हो गए। ये बेहद विशालकाय और डरावने हो गए। इन चूहों ने देश को हर तरह से खोखला कर दिया, जातिवाद, धर्म का ज़हर घोल दिया, देश की सुरक्षा, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ज़रूरतों सबको ख़तरे में डालकर रखा गया।

2014 में जब ये पहली बार पूरी तरह से बेदखल हुए और मोदी सरकार अस्तित्व में आई तभी से बड़े पैमाने पर पेस्ट कंट्रोल की कार्रवाई शुरू कर दी गई। चूहों में हाहाकार मच गया तो विशालकाय चूहे ज़्यादा आक्रामक होने लगे। इनको अपनी बादशाहत ख़तरे में नज़र आने लगी तो इन्होंने अपने सभी छोटे बड़े चूहों को साथ मिलाकर खोखले कर दिए गए सिस्टम को गिराने की क़वायद शुरू कर दी। अपने वफ़ादार चूहों को लोकतंत्र की जड़ें हिलाने और पूरे देश में ‘प्लेग’ फैलाने का आदेश दिया गया।

देश के चूहे

 

विशालकाय चूहे अब ज़्यादा आक्रामक होते जा रहे हैं और बड़े निशाने लगा रहे हैं ये अलग बात है कि फौरी नुक़सान के बाद ही इनके दाँतों की धार कुंद पड़ जाती है, लेकिन प्रयास तो कर ही रहे हैं।

महामारी से सिर्फ सरकार को ही नहीं हमको भी निपटना है और अपनी औक़ात से बढ़ते इन विशालकाय चूहों के लिए पेस्ट कंट्रोल हमें भी करना होगा तभी ये देश और हमारे बच्चों का भविष्य इन चूहों और प्लेग की महामारी से बचा रहेगा।

जय हिंद… Harshal Khairnar

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