भाजपा की चुनावी रणनीति में इस बार पश्चिम बंगाल सबसे अहम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने इस राज्य में चुनाव से पहले से ही सभाएं व रैलियां शुरू कर दी थी और तृणमूल कांग्रेस के साथ उसका जमकर टकराव भी हुआ। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में उसी तरह की तैयारी की है जैसी उसने पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में की थी। हालांकि संगठनात्मक व चुनावी रूप से भाजपा यहां पर उत्तर प्रदेश जैसी मजबूत नहीं रही है।

पश्चिम बंगाल में आखिरी दो चरणों में 17 सीटों का चुनाव बाकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां पर इन दो चरणों में छह रैलियां करेंगे। यह सभाएं बांकुरा, पुरुलिया, बशीरहाट, डायमंड हार्बर, मथुरापुर व दमदम में होंगी।

इन दो चरणों के लिए उनकी रैलियों की यह संख्या उत्तर प्रदेश के बाद सबसे बड़ी होगी। उत्तर प्रदेश में बाकी 27 सीटों के चुनाव के लिए मोदी आठ सभाएं करेंगे। इस राज्य से पिछली बार महज दो सीटें जीतने वाली भाजपा इस बार आधी सीटों का दावा कर रही है।

भाजपा को अपने बड़े गढ़ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि में जो नुकसान हो सकता है उसकी भरपाई व बढ़त वह पश्चिम बंगाल, ओडिशा व पूर्वोत्तर राज्यों से करने की तैयारी में है। राज्य में माकपा के कमजोर पड़ने के बाद भाजपा ने तृणमूल कांग्रेस को उसी तरह से चुनौती दी है, जिस तरह की कुछ साल पहले तृणमूल कांग्रेस ने माकपा सरकार को दी थी। यही वजह है कि राज्य में चुनाव में भाजपा व तृणमूल कांग्रेस में जमकर टकराव देखने को मिल रहा है। भाजपा को त्रिपुरा में मिली जीत का लाभ भी मिल रहा है।

भाजपा महासचिव मुरलीधर राव का कहना है कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनावों में भाजपा की सीटों की संख्या में भारी बढ़ोतरी होगी और यह संख्या आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़े बदलाव का आधार बनेगी। राव इस बात को खारिज करते हैं कि लोग तृणमूल कांग्रेस की हिंसा के डर से बाहर नहीं आ रही है। उनका कहना है कि इसके पहले जब राज्य में माकपा सरकार थी तो उसके काडर का भी ऐसा ही आतंक होता था, लेकिन लोगों से उसे भी बाहर कर दिया था। अब ममता बनर्जी उसी रास्ते पर चल रही है और वही इतिहास दोहराया जाएगा।

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