बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर जानिए उनके हिन्दू धर्म पर विचार

बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर जानिए उनके हिन्दू धर्म पर विचार
बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर जानिए उनके हिन्दू धर्म पर विचार

बिरसा मुंडा के जन्मदिवस पर जानिए उनके हिन्दू धर्म पर विचार:

 

बिसरा मुंडा भारतीय आदिवासी समाज को शिक्षित करने वाले पहले व्यक्ति माने जाते हैं। उन्होंने उस समय अंग्रेजों से लोहा लिया और लंबे समय तक अंग्रेजों की पकड़ से दूर रहे। उन्होंने हिन्दू धर्म और ईसाई धर्म का बारीकी से अध्ययन किया तथा इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि आदिवासी समाज मिशनरियों से तो भ्रमित है ही हिन्दू धर्म को भी ठीक से न तो समझ पा रहा है, न ग्रहण कर पा रहा है। धर्म के बिंदु पर आदिवासी कभी मिशनरियों के प्रलोभन में आ जाते हैं, तो कभी ढकोसलों को ही ईश्वर मान लेते हैं।भारतीय जमींदारों और जागीरदारों तथा ब्रिटिश शासकों के शोषण की भट्टी में आदिवासी समाज झुलस रहा था। आज जन्मदिवस पर जानिए उनके हिन्दू धर्म पर विचार । हिन्दू धर्म पर विचार हिन्दू धर्म पर विचार

बिरसा मुंडा

  1. हिन्दू कभी नहीं थे, तुम आज भी हिन्दू नहीं हो, तुम सनातनी हो।
  2. तुम्हें धर्म का भी गुलाम बना लिया गया है।
  3. धर्म छोड़ना धर्म परिवर्तन नहीं बल्कि गुलामी की जंजीरे तोड़ना है।
  4. जाति के अधार पर किसी को ऊँचा मानना पाप है और नीचा मानना महापाप।
  5. हिन्दू धर्म की आत्मा वर्ण जाति और ब्रह्मण हितेषी कर्मकांडो मैं है।
  6. वर्ण और जाति के बिना हिन्दू धर्म की कल्पना ही नहीं की जा सकती है।
  7. हिन्दू धर्म मे कर्म नहीं जाति प्रधान है। हिन्दू धर्म वर्णों का है तुम किसी भी वर्ण मैं नहीं आते हो, जबरदस्ती सबसे नीचे वर्ण मैं रखा गया है।
  8. हिन्दू धर्म के कर्मकांडों को तुम्हे नहीं करने दिया गया और तुम नहीं कर सकते हो।
  9. हिन्दु धर्म के भगवान उनके अवतार और उनके देवी देवता ना तो तुम्हारे हैं और न तुम उनके हो। इसलिए वे तुम्हारे साये से भी परहेज करते आये हैं और आज भी कर रहे हैं।
  10. कुत्ते बिल्ली की पेशाब से उन्हें कोई परहेज नहीं है परन्तु तुम्हारे द्वारा दिए गए गंगा जल से अपवित्र हो जाते हैं।
  11. उनकी पुनः शुद्धि गाय के मल-मूत्र से होती है।
  12. जब तक तुम हिन्दू रहोगे तुम्हारा स्थान सबसे नीचा रहेगा।
  13. याद रखो हिन्दू धर्म के देवी देवता ही तुम्हारे पूर्वजों के हत्यारे हैं!
  14. धर्म मनुष्य के लिए है मनुष्य धर्म के लिए नहीं और जो धर्म तुम्हें इन्सान नही समझता वह धर्म नहीं अधर्म का बोझ है |
  15. जहाँ ऊँच और नीच की व्यवस्था है, वह धर्म नही,गुलाम बनाये रखने की साजिश है।

यह भी जरूर पढे :

यह साल अक्षय का कमाई के मामले में टॉप 10 में 3 फिल्म शामिल

Comments

comments