अब्दुल अहद साज़ एक मशहूर शायर है और इनकी शायरी लोगों में काफी पसंद की जाती है आज हम आपके लिए इनके चुनिंदा बेहतरीन शेर लेकर आये है. पढ़िए मशहूर शायर अब्दुल अहद साज़ के बेहतरीन शेर 

  1. बचपन में हम ही थे या था और कोई
    वहशत सी होने लगती है यादों से
  2. दोस्त अहबाब से लेने न सहारे जाना
    दिल जो घबराए समुंदर के किनारे जाना
  3. नींद मिट्टी की महक सब्ज़े की ठंडक
    मुझ को अपना घर बहुत याद आ रहा है
  4. शेर अच्छे भी कहो सच भी कहो कम भी कहो
    दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुस्वा न करो
  5. वो तो ऐसा भी है वैसा भी है कैसा है मगर?
    क्या ग़ज़ब है कोई उस शोख़ के जैसा भी नहीं
  6. ख़बर के मोड़ पे संग-ए-निशाँ थी बे-ख़बरी
    ठिकाने आए मिरे होश या ठिकाने लगे
  7. मुफ़्लिसी भूक को शहवत से मिला देती है
    गंदुमी लम्स में है ज़ाइक़ा-ए-नान-ए-जवीं
  8. जिन को ख़ुद जा के छोड़ आए क़ब्रों में हम
    उन से रस्ते में मुढभेड़ होती रही
  9. नज़र तो आते हैं कमरों में चलते-फिरते मगर
    ये घर के लोग न जाने कहाँ गए हुए हैं
  10. यादों के नक़्श घुल गए तेज़ाब-ए-वक़्त में
    चेहरों के नाम दिल की ख़लाओं में खो गए
  11. बुरा हो आईने तिरा मैं कौन हूँ न खुल सका
    मुझी को पेश कर दिया गया मिरी मिसाल में
  12. शायरी तलब अपनी शायरी अता उस की
    हौसले से कम माँगा ज़र्फ़ से सिवा पाया
  13. ख़याल क्या है जो अल्फ़ाज़ तक न पहुँचे ‘साज़’
    जब आँख से ही न टपका तो फिर लहू क्या है
  14. घर वाले मुझे घर पर देख के ख़ुश हैं और वो क्या जानें
    मैं ने अपना घर अपने मस्कन से अलग कर रक्खा है
  15. जीतने मारका-ए-दिल वो लगातार गया
    जिस घड़ी फ़त्ह का ऐलान हुआ हार गया
  16. ज़माने सब्ज़ ओ सुर्ख़ ओ ज़र्द गुज़रे
    ज़मीं लेकिन वही ख़ाकिस्तरी है
  17. तुम अपने ठोर-ठिकानों को याद रक्खो ‘साज़’
    हमारा क्या है कि हम तो कहीं भी रहते हैं
  18. मैं बढ़ते बढ़ते किसी रोज़ तुझ को छू लेता
    कि गिन के रख दिए तू ने मिरी मजाल के दिन
  19. शोलों से बे-कार डराते हो हम को
    गुज़रे हैं हम सर्द जहन्नम-ज़ारों से

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