बाल गंगाधर तिलक के विचार और जीवन परिचय
बाल गंगाधर तिलक के विचार और जीवन परिचय

बाल गंगाधर तिलक जिन्हें हम लोकमान्य तिलक (Lokamanya Tilak) के नाम से भी जानते हैं एक महान विद्वान, गणितज्ञ, दार्शनिक, और राष्ट्रवादी व्यक्ति थे। उन्होंने आजाद भारत के नीव को मजबूत बनाने के लिए अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। बाल गंगाधर तिलक का जन्म महाराष्ट्र के कोंकण प्रदेश (रत्नागिरि) के चिक्कन गांव में 23 जुलाई 1856 को हुआ था। इनके पिता गंगाधर रामचंद्र तिलक एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण थे। अपने परिश्रम के बल पर शाला के मेधावी छात्रों में बाल गंगाधर तिलक की गिनती होती थी। वे पढ़ने के साथ-साथ प्रतिदिन नियमित रूप से व्यायाम भी करते थे, अतः उनका शरीर स्वस्थ और पुष्ट था।बाल गंगाधर तिलक के विचार और जीवन परिचय 

सन्‌ 1879 में उन्होंने बी.ए. तथा कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की। घरवाले और उनके मित्र संबंधी यह आशा कर रहे थे कि तिलक वकालत कर धन कमाएंगे और वंश के गौरव को बढ़ाएंगे, परंतु तिलक ने प्रारंभ से ही जनता की सेवा का व्रत धारण कर लिया था।

स्वयं अपने दम पर ब्रिटिश शासन को चुनौती देते हुए उन्होंने एक राष्ट्रीय आंदोलन को जागृत किया। लोकमान्य तिलक जी सन् 1914 में भारतीय गृह नियम लीग (Indian Home Rule League) के अध्यक्ष बने और 1916 में उन्होंने लखनऊ संधि को मोहम्मद अली जिन्ना के साथ संपन्न किया, जो राष्ट्रवादी संघर्ष में हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए बनाया गया था।

ल 1919 में बल गंगाधर तिलक जी भारत लौटे और अमृतसर के कांग्रेस पार्टी मीटिंग में भाग लिया। उन्होंने विधायी परिषदों के चुनावों का बहिष्कार करने की गांधी की नीति का विरोध करने के लिए पर्याप्त रूप से बिनम्र बात किया। महात्मा गाँधी जी ने तिलक जी को स्राधांजलि देते हुए आधुनिक भारत के निर्माता ‘The Maker of Modern India’ और पंडित जवाहर लाल नेहरु जी ने ‘भारतीय क्रांति के पिता’ The Father of the Indian Revolution का नाम दिया है। बाल गंगाधर तिलक / लोकमान्य तिलक जी का निधन 1 अगस्त 1920, निमोनिया होने के कारण हुआ था।

बाल गंगाधर तिलक के विचार 

  1. स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा।
  2. धर्म और व्यावहारिक जीवन अलग नहीं हैं। संन्यास लेना जीवन का परित्याग करना नहीं है। असली भावना सिर्फ अपने लिए काम करने की बजाए देश को अपना परिवार बनाकर मिल-जुलकर काम करना है। इसके बाद का कदम मानवता की सेवा करना है और अगला कदम ईश्वर की सेवा करना है।
  3. जीवन एक ताश के खेल की तरह है। सही पत्तों का चयन हमारे हाथ में नहीं है, लेकिन हमारी सफलता निर्धारित करने वाले पत्ते खेलना हाथ में है।
  4. अगर आप रुके और हर भौंकने वाले कुत्ते पर पत्थर फेंकेंगे तो आप कभी अपने गंतव्य तक नहीं पहुंचेंगे। बेहतर होगा कि हाथ में बिस्किट रखें और आगे बढ़ते जाएं।
  5. अगर भगवान अस्पृश्यता बर्दाश्त करता है तो मैं उसे भगवान नहीं कहूंगा।
  6. एक अच्छे अखबार के शब्द अपने आप बोल देते हैं।
  7. यह सच है कि बारिश की कमी के कारण अकाल पड़ता है, लेकिन यह भी सच है कि भारत के लोगों में इस बुराई से लड़ने के ताकत नहीं है।
  8. भारत की गरीबी पूर्ण रूप से वर्तमान सरकार के कारण है।
  9. आपके विचार सही, लक्ष्य ईमानदार और प्रयास संवैधानिक हों तो मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपकी सफलता निश्चित है।
  10. ईश्वर की यही इच्छा हो सकती है कि मैं जिस उद्देश्य का प्रतिनिधित्व करता हूं वो मेरे आजादी में रहने से ज्यादा मेरी पीड़ा में अधिक समृद्धि हो।

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