Bhangarh Fort Story in Hindi / भानगढ़ की डरावनी कहानी हिंदी में

Bhangarh Fort Story in Hindi

Bhangarh Fort Story in Hindi यह भानगढ़ की Hindi Best Story Pdf है। भानगढ़ का किला भारत के प्रसिद्ध डरावने स्थानों में से एक हैं।  लेकिन कई लोग मानते हैं कि जिस तरह  दिन है वैसे रात भी है…अगर पाप है तो पुण्य भी है…ईश्वर भी है तो राक्षस भी हैं। इसी तरह से भूत भी होते हैं।  आईये अब भानगढ़ किले के बारे में विस्तार से जानते हैं।

 

 

Bhangarh Fort Story in Hindi

 

 

 

भानगढ़ किला राजस्थान के अलवर में सरिस्का अभयारण्य की सीमा पर अरावली की खूबसूरत पहाड़ियों के साथ स्थित है। वैसे तो राजस्थान में कई किले हैं और सभी अपनी प्रसिद्धि के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन भानगढ़ का किला उनसे बिल्कुल अलग है।

 

 

 

भूतिया किला होने के कारण वहाँ सरकारी आदेश है कि किसी कको भी शाम ६ बजे के बाद यहां नहीं रुकने दिया जाए और इसीलिये लोगों को वहाँ से ५.३० बजे से हटा दिया जाता है।

 

 

 

Who built the Fort Of Bhangarh?

 

 

 

इतिहास के अनुसार, भानगढ़ का किला १५७३ में आमेर के राजा भगवंत दास ने अपने छोटे बेटे माधो सिंह के लिए बनवाया था। इसके बाद ३ पीढ़ियों ने इस नगर पर शासन किया।

 

 

 

माधोसिंह का भाई मान सिंह था, जो कि अकबर का सेनापति था।  माधोसिंह को उनके पुत्र चतर सिंह को उत्तराधिकारी बनाया गया।  चतर सिंह अजब सिंह का पुत्र था, जिसने अजबगढ़ का किला बनवाया था।

 

 

 

भानगढ़ किले का निर्माण बहुत ही सुन्दर तरीके से किया गया है। यह तीन तरफ से पहाड़ियों से घिरा होने के कारण काफी सुरक्षित है। यह एक बहुत बड़ा किला है और  वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है। इस किले में भगवान शिव, महाबली हनुमान, भगवान सोमेश्वर के प्राचीन मंदिर हैं।

 

 

 

 Bhangarh Quilla

 

 

 

इस किले की कई तरह की कहानियां है।  यहां एक बहुत बड़े तांत्रिक साधू रहते थे।  उनका नाम गुरु बालुनाथ था।  वे पहाड़ी पर एक झोपड़ी में रहते थे।

 

 

 

जब राजा भगवंत सिंह किले का निर्माण करवा रहे थे।  तब गुरु बालूनाथ ने एक शर्त रखी कि यह किला उनके झोपड़ी को ढकना चाहिए अर्थात किला उनके घर से ऊंचा नहीं होना चाहिए।  सभी इस शर्त को स्वीकार कर लिया, लेकिन अज़ब सिंह ने किसी भी कीमत पर इस शर्त को स्वीकार नहीं किया।

 

 

 

अज़ब सिंह के जिद के आगे किले का निर्माण शुरू किया गया और खम्बे के दो जोड़े उनके कुटी के ठीक आ गया और उसकी छाया उनके कुटी पर पड़ने लगी।  इससे साधू बहुत नाराज हुए और उन्होंने श्राप दे दिया।

 

 

 

जिसके वजह से किला और उसके अगल – बगल के गाँव नष्ट हो गए।  वहाँ अभी भी एक छोटी सी पत्थर की कुटिया है, जिसे तांत्रिक की छतरी के नाम से जाना जाता है।

 

 

 

How was Bhan Garh Fort cursed?

 

 

 

भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती बहुत खूबसूरत थी। पूरे राज्य में उनकी सुंदरता की चर्चा थी। उनके लिए शादी के कई प्रस्ताव आ रहे थे। इस राज्य में, एक काला जादू करने वाला तांत्रिक सिंधु सेवदा रहता था। कहीं-कहीं इसका नाम शिंधिया भी लिखा गया है। वह बहुत स्वार्थी और क्रूर था।

 

 

 

जब राजकुमारी  रत्नावती की चर्चा उस तांत्रिक के पास पहुंची तो वह राजकुमारी  को पाने के उतावला हो उठा।  उसने राजकुमारी को ढूढना शुरू किया।

 

 

 

कहा जाता है कि एक बार राजकुमारी अपनी सहेलियों और नौकरानी  के साथ बाजार घूमने के लिए निकलीं।  उसी समय काले जादूगर उस तांत्रिक साधू की नजर राजकुमारी रत्नावती पर पड़ी।

 

 

 

वह राजकुमारी की सुंदरता पर पागल था और राजकुमारी को किसी तरह हासिल करना चाहता था। इसके लिए उन्होंने काले जादू का इस्तेमाल किया।

 

 

 

Bhangarh Fort Story in Hindi Reading

 

 

 

एक दूकान पर राजकुमारी ने अपनी नौकरानी को केश तेल लाने को कहा।  तांत्रिक सिंधु सेवड़ा ने उस तेल पर काला जादू कर दिया।  उन्होंने उस तेल को अभिमंत्रित कर कहा कि जो भी इस तेल का उपयोग करेगा वह सम्मोहित होकर सिंधु सेवड़ा के पास आ जाएगा।

 

 

 

 

जब दासी इस केश तेल को राजकुमारी के पास ले गयी तो राजकुमारी ने महसूस किया कि इस तेल पर काला जादू किया गया है।  राजकुमारी को भी मन्त्रों का अच्छा ज्ञान था।

 

 

 

उसने नौकरानी को यह तेल एक चट्टान पर फेंकने का आदेश दिया। नौकरानी ने वैसा ही किया। जैसे ही तेल चट्टान पर गिरा, चट्टान कई हिस्सों में टूट गई और उसका एक हिस्सा बहुत तेज़ी से उस काले जादूगर की ओर बढ़ा और उस पर गिर पड़ा क्योंकि वह पहाड़ी उस काले जादूगर के मन्त्रों से प्रभावित हो गयी थी।

 

 

 

लेकिन मृत्यु से पहले सिंधु सेवड़ा ने राजकुमारी, उसके परिवार और पुरे गाँव को श्राप दे दिया।  उसके अगले वर्ष भानगढ़ और अजबगढ़ की सेना के बीच एक लड़ाई लड़ी गई, जिसमें रानी रत्नावती और अधिकांश सेना की मृत्यु हो गयी।

 

 

What is the timing and entry fees of Bhan Garh Fort?

 

 

राजस्थान में भानगढ़ किला घूमने का सबसे अच्छा समय सितम्बर से फ़रवरी के बीच है।  क्योंकि राजस्थान में बहुत गर्मी होती है, इसलिए गर्मियों में यहां जाना सही नहीं होगा।

 

 

यह किला सुबह 6 से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। हालांकि शाम 5.30 बजे के बाद ही लोगों को वहां से हटाया जाता है। यहां विदेशियों और भारतीयों दोनों के लिए प्रवेश निःशुल्क है। लेकिन कैमरे का उपयोग करने का शुल्क 25 रुपये निर्धारित किया गया है।

 

 

 

Here I answer some of your other questions which will end all your dilemmas.

 

 

1- Can you stay overnight at Bhan Garh Fort? क्या आप भानगढ़ किले में पूरी रात रह सकते हैं?

 

 

नहीं, आप इस किले में रात भर नहीं रह सकते हैं।  यह सरकार के द्वारा प्रतिबंधित है।

 

 

2- Can you photoshoot here? क्या आप यहां फोटो शूट कर सकते हैं?

 

 

हाँ, आप मोबाइल भी ले जा सकते हैं और फोटो भी निकाल सकते हैं, लेकिन व्यावसायिक उपयोग के लिए आपको सरकार से इज़ाज़त लेनी पड़ती है।

 

 

3- How Can You Reach Bhan Garh Fort? आप भानगढ़ किले तक कैसे पहुँच सक्कते हैं? Bhangarh Fort Story in Hindi 

 

 

आप जयपुर हवाई अड्डे या बांदीकुल रेलवे स्टेशन से भान गढ़ जा सकते हैं। हालांकि, आपको वहां की बाद की यात्रा के लिए कैब किराए पर लेनी होगी।

 

 

4-What is the nearest hotel? वहाँ नजदीकी होटल कौन सा है? 

 

 

भानगढ़ किले के पास कोई होटल नहीं है।  आप थोड़ी दूर होटल राज रिसार्ट या अमन बाग जा सकते हैं।  वहाँ ऐसे और भी होटल हैं।

 

 

5- Are there really ghosts? क्या भानगढ़ किले में वास्तव में भूत है? Bhangarh Fort Story in Hindi 

 

 

अभी तक इसका कोई प्रत्यक्ष प्रमाण  नहीं है।  गाइड कहते हैं कि यहां कोई भूत नहीं है, लेकिन स्थानिय लोगों के अनुसार वहाँ भूतों के होने का एहसास होता। है

 

 

 

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