Incident from Mahabharata, Bhim and guru dronacharya

Bhim and guru Dronacharya, जब भीम ने गुरु द्रोणाचार्य को रथ समेत फेंक दिया:- 

 

                        महाभारत के युद्ध में भीम के पराक्रम की तुलना किसी से की नहीं जा सकती। भीमसेन के बारे में वेदव्यास लिखते है कि भीम समान योद्धा कौरव और पांडव पक्ष में कोई और नहीं है। जब युद्ध में भीम अपनी गदा को घुमाते हुए दोड़ते थे तो उनकी गति वायु के समान होती थी।

महाभारत के युद्ध में एक बार द्रोणाचार्य ने अपने तीखे बाणो से पांडवो की सेना को बहुत नुकसान पहुंचाया। उस समय भीमसेन को चारो तरफ से कौरव पक्ष के राजाओं ने घेर लिया था। भीमसेन ने उस राजाओं की बिलकुल परवा न करते हुए अपनी गदा को घुमाते हुए इस प्रकार दोड़ने लगे कि समान्य सैनिक तो क्या बड़े बड़े योद्धा भी डर के मारे भागने लगे। कइयों को अपने प्राण भी गंवाने पड़े।

Bhim and guru Dronacharya

 

यह देखकर द्रोणाचार्य ने अपने तीखे बाण भीमसेन की तरफ मोड़ दिए। अपने पक्ष के सैनिको को मरते हुए देख भीम को बहुत गुस्सा आया. भीम अपने रथ से उतर गया और द्रोणाचार्य के बाण अपनी देह पर झेलते हुए उनके रथ की तरफ भागा।

भीम ने द्रोणाचार्य के रथ को उसी धुरी से पकड लिया और अपने गुरु समेत उस रथ को उठाकर हवां में उछाल दिया। द्रोणाचार्य भी कोई सामान्य योद्धा नहीं थे। वह तुरंत ही दुसरे रथ पर चढ़ गए और भीम के ऊपर बाणों की वर्षा करने लगे। भीम का क्रोध अभी शांत नहीं हुआ था। उसने दोबारा द्रोणाचार्य को रथ समेत फेंक दिया। इस तरह द्रोणाचार्य आठ बार नए रथ पर सवार होकर आये और भीम ने आठ बार द्रोणाचार्य को रथ समेत फेंक दिया।

उसके बाद भीम का क्रोध शांत हुआ और वह अपने रथ पर चढ़ गया और कौरव पक्ष के अन्य योद्धा से युद्ध करने चला गया। भीम का यह पराक्रम देवताओं को भी भय प्राप्त कराने वाला था तो फिर कौरव पक्ष के योद्धा तो कुछ नहीं थे. उस दिन किसी और की हिम्मत नहीं हुई कि वह भीम का सामना करे।

Bhim and guru Dronacharya

 

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