bhuli bisri yaadein

Bhuli Bisri Yaadein – बात दिल पे न लगाने की कसम खा ली है:-

ज़माने से हमने कुछ इस तरह निभा ली है

बात दिल पे न लगाने की कसम खा ली है

लड़ने की बजाए दिल जीत लिया उसका

दुश्मन को हराने की नई तरकीब निकाली है

देखा दबा जब गमों के बोझ तले किसी को

दुखों की गठरी उसकी अपने सर उठा ली है

न बुझेगी आंधीयों में जो दीये की मानिंद

सत्य की मशाल वो दिल में जला ली है

bhuli bisri yaadein

 

रहता है हर वक़्त मदहोश वो नशे में

ज़िन्दगी में जब से उसने होश संभाली है

पैसा बहुत है तेरे पास पर फिर तू गरीब है

तेरे पुण्यों का खाता तो बिल्कुल खाली है

बात कर रहें हैं हम तो ज़माने की ‘ राज ‘

तूने क्यूं गर्दन भला शर्म से झुका ली है

हमें मालूम है जिन्दगी जंग है

इसलिए खेतों में, फैक्टरियों में

ऊँचे-ऊचे महलों में सड़कों पर

नदियों में हम जीवन जीने के लिए

जंग में युगों से शामिल हैं

पर जरा बताइए भी जो सिर्फ भाषणों से

नाजायज बनाए साधनों से हमसे काम लेते हैं

नहीं मेहनत का नाम लेते हैं

लगाते समाज में पलीते हैं

खून का जाम पर जाम पीते हैं

घूमती हैं लाखों की साड़ियों

टूर करते हैं एयरकंडीशंड गाड़ियों में

वे कौन-सा जंग करते हैं

जरा कहिए तो उनसे जिन्दगी जंग है

हजारों की बेईमानी से करोड़ों की जेबें तंग हैं.

bhuli bisri yaadein

 

—–स्पर्श—–

तुम्हारे स्पर्श के इंतजार का सुख
धीमे-धीमे बरसते हुए बादलों की तरह है
जब न तो कहीं तालाबों में पानी ही भरता है
और न सड़कें सूखी ही रहती हैं।
टूटता हुआ दिल फिर से जुड़ने लगता है
सात रंगों के घमासान में
प्रत्येक रंग अलग-अलग
बाकी रंगों से लड़कर
उन्हें पछाड़ने की युक्ति सोचता है।
और मेरे चेहरे पर मुस्कराहट के
नक्श की मानिंद उभरने लगता है।
स्पर्श के सुख के इंतजार में
जब उनींदी सी बन्द होती हुई आंखों में
रक्त के लाल डोरे उभरने लगते हैं
तो कड़ी हुई आंखें

bhuli bisri yaadein

 

दरवाजे पर तुम्हारी दस्तक की आवाज से
बरसात के मौसम में बन्द,
फैली हुई खिड़कियों की तरह
चरमराहट की आवाज के साथ
बामुश्किल खुलती हैं
और आंखों के अंदर के लाल डोरे
टूटकर बिखर जाते हैं।

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Emotional Romantic Shayari,

bhuli bisri yaadein

 

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