पहले भारत और पाकिस्तान के बड़े शायर जॉन एलिया के शेर

पहले भारत और पाकिस्तान के बड़े शायर जॉन एलिया के शेर
पहले भारत और पाकिस्तान के बड़े शायर जॉन एलिया के शेर

एक ऐसा शायर जॉन एलिया यानी ऐसा नाम, कौतूहल जिनके नाम के साथ ही शुरू हो जाता है। जॉन एलिया का जन्म उत्तर प्रदेश के अमरोहा में हुआ , आज़ादी के बाद वो 10 साल तक भारत में ही रहे और फिर वो कराची चले गए . वहां वो बहुत बड़े शायर बनकर उभरे. संवाद शैली में,आसान शब्दों में,लगभग हर विषय पर नज्म या ग़ज़ल कह सकने वाले … मन के उलझे हुए तारों के गुंजलक को बड़ी सादगी के साथ सुलझाने वाले जौन मौत के बाद और भी अधिक मश्हूर हुए। उनकी गजलों पर दो किताबें देवनागरी में सामने आई हैं।

  1. जो गुज़ारी नहीं जा सकी हम से
    मैंने वो ज़िंदगी गुज़ारी है
  2. मैं भी न कुछ बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
    ख़ुद को पूरा तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं
  3. पता नहीं मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता
    क्या सिर्फ एक ही शख़्स था जहान में क्या
  4. सुनो बहुत नज़दीक आती जा रही हो
    जल्दी बिछड़ने का इरादा कर लिया क्या
  5. कैसे कहें कि तुझ को भी हम से है वास्ता कोई
    तू ने तो हम से आज तक कोई गिला नहीं किया
  6. मेरा इलाज ये है कि मजबूर कर दिया जाऊँ
    वरना यूँ तो मैं किसी की नहीं सुनी मैंने
  7. कौन इस मेरे घर की देख-भाल करे
    रोज़ इक इक चीज़ टूट जाती है
  8. कितनी दिलकश हो तुम कितना दिल-जू हूँ मैं
    क्या सितम है कि हम लोग मर जाएँगे
  9. उस गली ने ये सुन के सब्र किया
    जाने वाले यहाँ के थे ही नहीं
  10. मेरी बाँहों में बहकने की सज़ा भी सुन ले
    अब बहुत देर में आज़ाद करूँगा तुझ को
  11. क्या कहा इश्क़ जावेदानी है!
    आख़िरी बार मिल रही हो क्या
  12. क्या सितम है कि अब तिरी सूरत
    ग़ौर करने पे याद आती है
  13. मैं रहा उम्र भर जुदा ख़ुद से
    याद मैं ख़ुद को उम्र भर आया
  14. ज़िंदगी किस तरह बसर होगी
    दिल नहीं लग रहा मोहब्बत में
  15. अपना रिश्ता ज़मीं से ही रक्खो
    कुछ नहीं आसमान में रक्खा

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