ओडिशा की आध्यात्मिक नगरी में केंद्रपाड़ा शुमार करती है. मान्यता कहती है कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने यहीं केंद्रसुर का वध कर उसकी पुत्री से विवाह किया और फिर यहीं बस गए.

ओडिशा की आध्यात्मिक नगरी में केंद्रपाड़ा शुमार करती है. मान्यता कहती है कि भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम ने यहीं केंद्रसुर का वध कर उसकी पुत्री से विवाह किया और फिर यहीं बस गए. यहां पर श्री बलदेव जू मंदिर प्रमुख धार्मिक आकर्षण का केंद्र है और पुरी रथयात्रा की ही तरह यहां बलराम की रथयात्रा भी निकाली जाती है. केंद्रपाड़ा में बंगाल की खाड़ी का बीच सैलानियों को लुभाता है. यहां के गहीरमाथा बीच पर लोग कछुओं को देखने के लिए आते हैं.

लेकिन इन तमाम कुदरती और धार्मिक तस्वीरों से परे यहां की सियासत भी देश की राजनीति को संदेश भेजने का काम करती है.

केंद्रपाड़ा में सबसे पहले 1952 में लोकसभा चुनाव हुए. तबसे लेकर अब तक केंद्रपाड़ा में 17 बार लोकसभा चुनाव हो चुके हैं जिसमें 5 बार बीजू जनता दल जीती है. यहां पहली बार कांग्रेस के नित्यानंद चुनाव जीते. लेकिन फिर 1957, 1962 और 1967 में यहां से प्रजा सोशलिस्ट पार्टी चुनाव जीतती रही. 1971 में कांग्रेस ने दोबारा यहां वापसी की. लेकिन ओडिशा के कद्दावर नेता बीजू पटनायक ने कांग्रेस से नाराज हो कर उत्कल कांग्रेस की सथापना की और फिर वो यहां से चुनाव जीतते रहे. बीजू पटनायक 1977,1980 और 1984 में चुनाव जीते. 1998 में बीजू जनता दल जब वजूद में आई तो इस सीट कांग्रेस को छोड़कर सभी पार्टियां साफ हो गईं. 1998 से केंद्रपाड़ा पर बीजेडी का कब्जा है.

कौन हैं प्रत्याशी केंद्रपाड़ा लोकसभा सीट से बीजेडी ने ओड़िया फिल्म अभिनेता अनुभव मोहंती को उतारा है. जबकि बीजेपी ने मौजूदा सांसद बैजयंत जय पांडा को उतारा है. जय पांडा केंद्रपाड़ा से सांसद हैं और वो बीजेडी छोड़कर अब बीजेपी में शामिल हुए हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में केंद्रपाड़ा से बीजू जनता दल के प्रत्याशी रहे बैजयंत जय पांडा ने कांग्रेस प्रत्याशी धरणीधर नायक को हराया था. बैजयंत पांडा के बीजेपी में आने से वोटरों पर पांडा की अपील का असर पड़ सकता है. जय पांडा बीजेडी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं.

केंद्रपाड़ा में विधानसभा की 5 सीटें हैं. ये सीटें हैं सलीपुर, महंगा, पटकुरा, केंद्रपाड़ा, औल, राजनगर और महाकलपद. सलीपुर, औल और राजनगर में कांग्रेस ने जीत हासिल की थी जबकि 4 सीटों पर बीजू जनता दल ने जीत हासिल की थी. 2011 की जनसंख्या के मुताबिक कोरापुट की आबादी 20 लाख 39 हजार 740 थी. यहां 95 फीसदी आबादी ग्रामीण इलाकों और 5 फीसदी लोग शहरों में रहत हैं. यहां अनुसूचित जाति की 22 फीसदी आबादी है जबकि अनुसूचित जनजाति की आबादी 2 फीसदी है.

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