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हिंदी कविता

Hindi Kavita for all movements

*दर्द कागज़ पर,* *मेरा बिकता रहा,* *मैं बैचैन था,* *रातभर लिखता रहा..* *छू रहे थे सब,* *बुलंदियाँ आसमान की,* *मैं सितारों के बीच,* *चाँद की तरह छिपता रहा..* *अकड होती तो,* *कब का टूट गया होता,* *मैं था नाज़ुक डाली,* *जो सबके आगे झुकता रहा..* *बदले यहाँ लोगों ने,* *रंग अपने-अपने ढंग से,* *रंग मेरा भी निखरा पर,* *मैं मेहँदी की तरह पीसता रहा..* *जिनको...
इस कविता के अंत में कोई कसम नहीं है क्योंकि ये कविता इतनी अच्छी है आप खुद शेयर किये बिना नहीं रह पाओगे :- माँ पर सबसे बेहतरीन कविता : लेती नहीं दवाई "माँ", जोड़े पाई-पाई "माँ"। दुःख थे पर्वत, राई "माँ", हारी नहीं लड़ाई "माँ"। माँ पर सबसे बेहतरीन कविता   इस दुनियां में सब...
"हर उस बेटे को समर्पित जो घर से दूर है" *बेटे भी घर छोड़ जाते हैं😔 😔 जो तकिये के बिना कहीं...भी सोने से कतराते थे... आकर कोई देखे तो वो...कहीं भी अब सो जाते हैं... खाने में सो नखरे वाले..अब कुछ भी खा जाते हैं... अपने रूम में किसी को...भी नहीं आने देने वाले... अब...
दहेज पर कविता दहेज की बारात आप भी पढ़कर आनंद उठाएं, Dahej par poem:-   हास्यावतार स्वर्गीय श्री काका हाथरसी जी को श्रद्धांजली दहेज की बारात (काका हाथरसी) आप भी पढ़कर आनंद उठाएं... जा दिन एक बारात को मिल्यौ निमंत्रण-पत्र, फूले-फूले हम फिरें, यत्र-तत्र-सर्वत्र, यत्र-तत्र-सर्वत्र, फरकती बोटी-बोटी, बा दिन अच्छी नाहिं लगी अपने घर रोटी, कहं...
Story of every man, जीवन में 45 पार के हर गरीब मर्द की जिदगी को बयाँ करती कविता:- जीवन में 45 पार का मर्द *कैसा होता है ?   थोड़ी सी सफेदी कनपटियों के पास, खुल रहा हो जैसे आसमां बारिश के बाद, जिम्मेदारियों के बोझ से झुकते हुए कंधे, जिंदगी की भट्टी में...
मोदी की चिंता मत करो, अपनी और अपनी आने वाली पिढीयौ की चिंता करो,, ये आखिरी मौका है। फिर कोई *नरेन्द्र मोदी जेसा हिंदुवादी शासक* नहीं मिलेगा। हिन्दू शासक मन की हल्दीघाटी में, राणा के भाले डोले हैं, यूँ लगता है चीख चीख कर, वीर शिवाजी बोले हैं, पुरखों का बलिदान, घास की, रोटी भी शर्मिंदा है, कटी...
मर्द और बलात्कार विषय पर ये पंक्तियाँ अवश्य पढ़ियेगा:-  Poem on Rape in Hindi:-   “मर्द कभी बलात्कार नहीं करते हैं, माँ की कोख शर्मशार नहीं करते हैं.. मर्द होते तो लड़कियों पर नहीं टूटते, मर्द होते तो आबरू उनकी नहीं लूटते.. मर्द हमेशा दिलों को जीतता है, कुचलना नामर्दों की नीचता है… बेटियां बहन मर्द के साये...
Chhoti si shikayat - कविता - छोटी सी शिकायत मुझे अपने आप से:-   तुम जो रोज हमारे पास रहकर भी यू हमसे दूर दूर रहते हो हमे अच्छा नही लगता ..... तुम जो हमारे वक़्त पे भी हमे वक़्त नही दे पाते हो हमे अच्छा नही लगता..... तुम से शिकायत करु या शिकवा कुछ भी कहो ऐसा करना हमे अच्छा...
पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट! हास्य कविता :- पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हास्य कविता एक दिन दफ्तर से घर आते हुए पुरानी गर्ल फ्रेंड से भेट हो गयी, और जो बीवी से मिलने की जल्दी थी वह ज़रा से लेट हो गयी; जाते ही बीवी ने आँखे दिखाई, -आदतानुसार हम पर...
Masoom bachchiyon ke balatkar par Hindi Poem:-   माँ मेरा # कसूर नही था________ एक चाचू से चॉकलेट ही तो ली थी .. __________________ # बाबा सा वो लगता था !! मुझे बोला तुम # बेटी हो मेरी !! _________________ उसके पहलू मे बैठ गई मै .. चॉकलेट खाती , बाते करती .. _________________हाथ मेरे सर पर...
श्री कृष्णा के जन्मदिवस पर बहतरीन कविता, Shrikrishna Poem:- प्रेम का सागर लिखूं! या चेतना का चिंतन लिखूं! प्रीति की गागर लिखूं,  या आत्मा का मंथन लिखूं! रहोगे तुम फिर भी अपरिभाषित, चाहे जितना लिखूं.... ज्ञानियों का गुंथन लिखूं , या गाय का ग्वाला लिखूं.. कंस के लिए विष लिखूं , या भक्तों का अमृत प्याला लिखूं। रहोगे तुम फिर...
दहेज की बारात (काका हाथरसी) की बेहतरीन कविता, दहेज़ पर कविता:- हास्यावतार स्वर्गीय श्री काका हाथरसी जी को श्रद्धांजली दहेज की बारात (काका हाथरसी) आप भी पढ़कर आनंद उठाएं...   जा दिन एक बारात को मिल्यौ निमंत्रण-पत्र, फूले-फूले हम फिरें, यत्र-तत्र-सर्वत्र, यत्र-तत्र-सर्वत्र, फरकती बोटी-बोटी, बा दिन अच्छी नाहिं लगी अपने घर रोटी, कहं 'काका' कविराय, लार म्हौंड़े...

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