सीरीज की कहानी राजस्थान के शहर कोटा पहुंचने वाले छात्रों की उन मनोभावनाओं को सामने लाने की कोशिश करती है, जिससे अक्सर इन छात्रों के अभिभावक भी अनजान रहते हैं। पेट काटकर फीस भरने वाले अपने माता पिता की उम्मीदों पर खरा उतरने के मानसिक दबाव में रहते इन छात्रों पर दूसरा दबाव अपने ही साथ के दूसरे छात्रों का भी रहता है। दुनिया बदल चुकी होती है। सब कुछ वैसा ही नहीं होता जैसा सोचकर ये छात्र घर से यहां आते हैं। ये फैक्ट्री है, जिसमें एक तरफ से छात्र डाला जाता है, दूसरी तरफ से इंजीनियर निकल ही आएगा, इसकी कोई गारंटी नहीं। सीरीज में दम है

1. हम तो बेटा यहाँ तब से है जब कोटा factory नहीं शहर हुआ करता था।

2.कही भी पत्थर फेक के मारोगे तो Student को ही लगेगा।

3. यहाँ लड़ाई इस बात की नहीं है की कोचिंग IIT का solution दे पाई या नहीं, बल्कि इस बात की है की किस कोचिंग ने सबसे पहले दी।

4. ये भारत का एकमात्र शहर है जहाँ सैमसंग नहीं बल्कि नोकिया का बोलबाला है।

5. यहाँ आकर किसी Student का selection हो ना हो,पर यहाँ आकर भी जिसका नहीं हुआ उसका तो होना ही नहीं था।

6.9th में Pokemon,10 में PUBG 11th में कोटा। क्यों ? शर्मा जी पूछेंगे तो बातएंगे की कोटा में NEET की IIT की तैयारी कर रहे है। Cool लगता है। फैशन है।

7.कोटा में IIT करने से पहले यहाँ रहने की तैयारी करनी पड़ती है।

8 दो साल में बच्चे कोटा से निकल जाते है। कोटा सालो तक बच्चो से नहीं निकलता।

9. इस कच्ची उम्र में किसी चीज को इतनी दिल से चाहो ना तुम तो दो ही चीज़ होता है अगर मिल गयी तो सुकून है,और नहीं मिला ना,तो मिलता है jealousy,चुभन ,Self Doubt. भाई साहब confidence गिर जाता है। फिर जितना दुनिया Loser नहीं समझती उतना आदमी खुद को loser समझने लगता है।

10-.क्या करता है कोटा, तुमको दुनिया से काट कर अलग रख देता है फिर कहाँ किसकी सरकार गिरी किसकी किससे शादी हुई आई.पी. एल किसने जीता ये सब कोई matter नहीं करता लाइफ में।

11-अच्छा बेटा ये बता तेरा मन लग रहा है ना

12. फ़ोन नहीं उठा रहा है ? अब इसका मन लग गया।

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