कैसा रहेगा इस बार यूपी की फरुखाबाद सीट का समीकरण , क्या जीत पाएंगे कांगेस के सलमान खुर्शीद

यूपी की फर्रुखाबाद लोकसभा क्षेत्र में दलित-पिछड़ा-मुस्लिम फैक्टर चलता तो वह बीजेपी के लिए परेशानी होती. लेकिन सलमान खुर्शीद की मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी पकड़ मानी जाती है और मुस्लिम वोटर 14 फीसदी हैं.

मध्य उत्तर प्रदेश की फर्रुखाबाद लोकसभा मुलायम सिंह यादव के उद्भव के बाद समाजवादी पार्टीमय हो गई है. 1999 के आम चुनाव हो या फिर 2004 के यहां सपा के चंद्र भूषण सिंह उर्फ मुन्नू बाबू की साइकिल चली. लेकिन प्रदेश में मुलायम कमजोर होते ही यहां कांग्रेस सलमान खुर्शीद ने वापसी कर ली. 2009 के आम चुनाव में सलमान खुर्शीद ने यहां से बाजी मारी और देश के कानून मंत्री, विदेश मंत्री जैसे उच्च पदों रहे व संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन (UPA) की सरकार के प्रमुख नेताओं में शामिल हुए.

लेकिन उनकी पत्नी लूइस खुर्शीद के गैर सरकारी संगठन (NGO) पर भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे और विवादित बयानों को लेकर चर्चा में आया ये सुप्रीम कोर्ट के दिग्गज वकील ने अपने गृह लोकसभा में जनाधार खो दिया. नतीजनत वे 2014 के चुनाव में चौथे स्‍थान पर खिसक गए थे. लेकिन इस बार उन्होंने फ‌िर से पूरी ताकत से चुनाव लड़ा है, जो उनके या समान विचार वाले गठबंधन के लिए फायदमंद कम नुकसान ज्यादा है.

भारतीय जनता पार्टी ने फर्रुखाबाद सीट के लिए इस बार भी अपने 15 साल बाद क्षेत्र में कमल खिलाने वाले उम्मीदवार पर भरोसा जताया है. ये उम्‍मीवाद हैं, मुकेश राजपूत. इसके अलावा कांग्रेस ने भी अपने क्षेत्र के दिग्गज सलमान खुर्शीद पर ही इस बार फिर से दांव लगाया है. जबकि समाजवादी पार्टी व बहुजन समाज पार्टी के गठबंधन इस बार अपने पिछले साल के दोनों उम्मीदवार बदल दिए हैं. इस बार गठबंधन के प्रत्याशी मनोज अग्रवाल हैं.

इस बार सपा-बसपा गठबंधन ने भी अगड़ी जाति का उम्मीदवार मैदान में उतारकर जता दिया है वे जाति आधारित वोट करने वालों में पिछड़ना नहीं चाहते हैं. फर्रुखाबाद लोकसभा चुनाव 2014 के परिणाम 2014 आम चुनाव में मोदी लहर में यहां बीजेपी के मुकेश राजपूत ने बाजी मारी थी. तब उन्होंने कुल 406195 वोट हासिल किया था. तब उनके निकटतम प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार रमेश्वर यादव रहे थे. उन्होंने कुल 255,693 वोट पाए थे. बीजेपी उम्मीदवार की जीत एक लाख 55 हजार वोटों से हुई थी. जबकि तीसरे नंबर पर रहने वाले बसपा के जयवीर सिंह को 114,521 वोट ही मिले थे. ऐसे में अगर दूसरे और तीसरे नंबर की पार्टियों के गठबंधन के वोट को जोड़कर देखें तब भी वो बीजेपी उम्मीदवार से आगे नहीं निकलते.

पीएम मोदी के बनारस की पड़ोसी सीट पर BJP क्यों नहीं लड़ रही है चुनाव, 2014 में 10 साल बाद खिला था कमल. ऐसे में अगर चौथे नंबर पर आए कांग्रेस उम्मीदवार सलमान खुर्शीद के 95,543 वोट जोड़ दिए जाएं तो गठबंधन उम्मीदवार बीजेपी पर भारी पड़ जाता. लेकिन इस बार चुनौती ये है कि यह सीट गठबंधन ने बीएसपी के मनोज अग्रवाल को लेकर दलित और ओबीसी मतदाताओं को वैसे भी नाराज किया जै जबकि सलमान खुर्शीद मैदान में पहले से ज्यादा मेहनत के साथ ताल ठोंके हुए थे.

फर्रुखाबाद लोकसभा का समीकरण
फर्रुखाबाद लोकसभा सीट एक चौथाई ग्रामीण क्षेत्र आधारित है. 2017 के विधानसभा चुनावों की वोटर लिस्ट से देखें तो यहां कुल 16,76,677 मतदाता हैं. जबकि क्षेत्र में कुल पांच अलीगंज, कैमगंज, अमृतसर, भोजपुर और फर्रुखाबाद विधानसभाएं हैं. फिलवक्त ये सभी बीजेपी के खाते में हैं.

साल 2011 में हुई मतगणना के अनुसार यहां की कुल आबादी करीब 2370591 है जिसमें करीब 80.25 फीसदी ग्रामीण बताई जाती और 19.75 फीसदी आबादी शहरी है. लेकिन यहां अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की कुल आबादी महज 16.12 फीसदी ही. इसके अलावा 14 फीसदी वोटर मुसलमान जरूर हैं. यूपी की दूसरी सीटों की तरह अगर दलित-मुस्लिम का फैक्टर यहां भी चलता तो वह बीजेपी के लिए परेशानी का सबब हो सकता था. लेकिन सलमान खुर्शीद की मुस्लिम मतदाताओं में अच्छी पकड़ मानी जाती है.

ऐसे में इस सीट का निर्णय इस बार फिर से राजपूत व अगड़ी जाति व ओबीसी व खासतौर पर यादव वोटों में टक्कर है. इनमें से जो उम्मीदवार अपने पक्ष को ज्यादा मजबूत कर ले जाएगा जीत उसी करवट बैठ जाएगी. बात करें शहरी मतदाताओं की जो जाति आधारित वोट नहीं करते, तो उनमें सलमान खुर्शीद की अच्छी पैठ है.

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