1. ऐ मातृभूमि तेरी जय हो, सदा विजय होप्रत्येक भक्त तेरा, सुख-शांति-कान्तिमय हो– राम प्रसाद बिस्मिल

  2. दिल से निकलेगी न मर कर भी वतन की उल्फ़तमेरी मिट्टी से भी ख़ुशबू-ए-वफ़ा आएगी-लाल चन्द फ़लक

  3. हम ख़ून की क़िस्तें तो कई दे चुके लेकिनऐ ख़ाक-ए-वतन क़र्ज़ अदा क्यूँ नहीं होता– वाली आसी

  4. सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में हैदेखना है ज़ोर कितना बाज़ु-ए-कातिल में है– बिस्मिल अजीमाबादी

  5. न इंतिज़ार करो इन का ऐ अज़ा-दारोशहीद जाते हैं जन्नत को घर नहीं आते– साबिर ज़फ़र

  6. कभी दिल मांग लेना,कभी जान माँग लेना,अगर मौत अपनी चाहिए,तो कभी हमसे हिन्दुस्तान माँग लेना।दिल में हौसलों का तेज और तूफ़ान लिए फिरते है,आसमान से उंची हम अपनी उड़ान लिए फिरते है,वक्त क्या आजमाएगा हमारे जोश और जूनून को,हम तो मुठ्ठी में अपनी जान लिए फिरते हैं।

  7. भरी जवानी में अपनी माँ के चरणों में,कर दिया अपने प्राणों का समर्पण,रहेंगे अगर हमारे दिलों में वो, अपने शब्दों से करता हूँ श्रद्धा सुमन अर्पण।

  8. मुझे तन चाहिए न धन चाहिए बस अमन से भरा ये वतन चाहिएजब तक जिंदा रहूं इस मात्रभूमि के लिए और जब मरूं तो तिरंगा कफ़न चाहिए

  9. उनके हौसले का भुगतान क्या करेगा कोई उनकी शहादत का कर्ज़ देश पर उधार हैआप और हम इस लिए खुशहाल हैं क्योंकि सीमा पर सैनिक शहादत को तैयार हैं

  10. कुछ नशा तिरंगे की आन का है कुछ नशा मात्रभूमि की शान का हैहम लहराएंगे हर जगह ये तिरंगा नशा ये हिंदुस्तान की शान का हैविजय दिवस की हार्दिक बधाई

  11. लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगामैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा

  12. मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिएबस अमन से भरा यह वतन चाहिएजब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिएऔर जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये

  13. किसी गजरे की खुशबू को महकता छोड़ आया हूँ,मेरी नन्ही सी चिड़िया को चहकता छोड़ आया हूँ,मुझे छाती से अपनी तू लगा लेना… ऐ भारत माँ,मैं अपनी माँ की बाहों को तरसता छोड़ आया हूँ।

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