जब औरंगजेब ने Kashi Vishwanath मंदिर को तोड़ा था, सच क्रूरता के फरमान का।

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जब औरंगजेब ने Kashi Vishwanath मंदिर को तोड़ा था, सच क्रूरता के फरमान का:-

काशी विश्वनाथ मंदिर बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। काशी विश्वनाथ मंदिर का हिंदू धर्म में एक विशिष्ट स्थान है। कहा जाता है कि यह भगवान शंकर के त्रिशूल पर टिकी है। इस नगरी को बनाया और बसाया खुद बाबा विश्वनाथ ने।
इस काशी की अपनी खास संस्कृति है, जीवन शैली है। काशी महज ईंट-गारों से बसा शहर नहीं इसके कण-कण में भारतीय संस्कृति, सभ्यता, परंपरा का पुट है। इन सब के केंद्र बिंदु में हैं बाबा विश्वनाथ।
18 अप्रैल 1669 को औरंगजेब ने एक फरमान जारी कर काशी विश्वनाथ मंदिर ध्वस्त करने का आदेश दिया। यह फरमान एशियाटिक लाइब्रेरी, कोलकाता में आज भी सुरक्षित है। उस समय के लेखक साकी मुस्तइद खां द्वारा लिखित ‘मासीदे आलमगिरी’ में इस ध्वंस का वर्णन है।
औरंगजेब के आदेश पर यहां का मंदिर तोड़कर एक ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई। 2 सितंबर 1669 को औरंगजेब को मंदिर तोड़ने का कार्य पूरा होने की सूचना दी गई थी।
वर्तमान में कुल स्थान के आधे हिस्से में मंदिर है और आधे में मस्जिद |
जैसा आपने मथुरा में भगवान कृष्ण की जन्म स्थली और साथ ही ईदगाह मस्जिद देखी होगी , लगभग वैसी ही स्थिति यहाँ मंदिर में है | ( वैसे तो ऐसी स्थिति भारत के सैंकड़ो मंदिरों में है जिसे तोड़कर मस्जिदें बनाई गई )
गंगा जी से काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य द्वार तक आने के लिए जो एक गली जाती है वो मात्र 4 फीट चौड़ी है , और तर्क दिया जा रहा है ,की इसे और चौड़ा करना है ताकि मंदिर तक पहुचने में आसानी हो सके | इस कारण गली के अगल -बगल बहुत से मंदिर जिनका पुराणों में वर्णन है, वो भी तोड़े जा रहे है ,
दरअसल वास्तविक बात ये है की काशी विश्वनाथ मंदिर के स्थान में जो आधा हिस्सा मस्जिद का है वहां कभी नमाज अदा नहीं होती ,
उसका कारण ये है की गली की कुल चौड़ाई मात्र 4 फीट है , तो मुल्लों को सदा से ये भय सताता रहता है , की काशीमें वृंदावन की भांति हमेशा हिन्दुओ का जमावड़ा लगा रहता है , ऐसे में यदि उन्होंने मंदिर के ही स्थान पर औरंगजेब द्वारा बनाई मस्जिद में नमाज अदा करने का चक्कर डाला , और पीछे से हिन्दुओ का हमला हो गया तो भागने तो स्थान नहीं मिलेगा ,
आप स्वयं विचार करें जो मुल्ले आये दिन कभी रेलवे स्टेशन के बीचों बीच, और कभी चौराहें पर मजार आदि बनाकर नमाज चालू कर देते है वो काशी की ज्ञानवापी मस्जिद में हिन्दुओ को सताने के लिए नमाज अदा क्यों नहीं करते ? कारण वही है जो हमने ऊपर बताया है ,
अत: काशी में मंदिरों को तोड़ने का सारा खेल 2019 में मुस्लिम वोट बैंक को लुभाने के लिए भाजपा द्वारा एक सोचा समझा प्लान है , जिसे संघ का समर्थन प्राप्त है , संघ पुरे मुद्दे पर मौन है , संघ तो उल्टा दुसरी और अयोध्या में 5 लाख मुसलमानों द्वारा नमाज अदा करने का आयोजन कर रहा है , ( जनसत्ता अख़बार की न्यूज है ढूढ़ लो नेट पर ) क्योंकि संघ का नाम सुनते ही भक्त सबूत मांगने लगते है , जब सबूत दे भी दिया जाये तो उसके fake बोल कर खिसक लेते है ,
आपको याद होगा 2014 के चुनाव से पूर्व गुजरात के बहुत बड़े सतर के मुसलमानों का एक जत्था बनाकर बनारस भेजा गया था , जिन्होंने यहाँ के मुस्लिमों को मोदी को वोट देने के लिए प्रेरित किया , शायद अब आपको अनुमान लग गया होगा ,की उन मुल्लो ने बनारस के मुल्लो को क्या कह कर प्रेरित क्या होगा ,
अंत में एक और बात विश्वनाथ मंदिर पहले से विवादित होने के कारण सरकारी रिसीवर बैठा हुआ है , अर्थात मंदिर का सारा दान सरकारी रिसीवर ही कोलेक्ट करता है ,और सरकारी खजाने में जमा करता है . जिस मुल्लो को सहुलते देने का कार्य होता है. ( वैसे भारत के लगभग सभी बड़े मंदिरों की यही स्थिति है , दान सरकारी रिसीवर एकत्रित करता है ) जानबूझ कर ट्रस्ट में विवाद करवा दिया जाता है ताकि मामला कोर्ट में जाये , और सरकारी रिसीवर बैठ जाये और दान सरकार एकत्रित करें ,
(वैसे एक बार अखिलेश यादव में वृंदावन के बिहारी जी मंदिर में भी ऐसा करने का प्रयास किया था लेकिन सफलता नहीं मिली |)
और अब दुसरी हैरान करने वाली बात ये है की सड़क चौड़ी करने के नाम पर जो मुआवजा देकर मंदिर और घर तोड़े जा रहे है ,उनकी रजिस्ट्री विश्वनाथ मंदिर के ट्रस्ट के नाम पर नहीं बल्कि राजपाल के नाम पर करवाई जा रही है , क्योंकि सम्पति अगर ट्रस्ट की होगी , तो हिन्दू धर्म के कार्यो के लिए ही प्रयोग हो पायेगी ,
लेकिन अगर एक बार सरकार की हो गई , तो सरकार फिर उसे अपने अनुसार ही प्रयोग करेगी , या दुसरे शब्दों में कहा जाये की मुल्लो को सहुलते बाटने में आसानी होगी ,
इसी तरह का कार्य महाराष्ट्र में चल रहा है , 1000 से अधिक मंदिरों को तोड़ने का फरमान जारी हो गया है , पूरी सूची है हमारे पास | आपको link भी दिखा सकता हूँ , एक-एक मंदिर का नाम और उसका पता लिखा हुआ है | ( लेकिन आप अगर पहले ही ठान चुके है की link आदि सबूत को fake कहकर गालियाँ देना है तो आपका कुछ नहीं हो सकता )
जानता हूँ मैं इतना सब लिखने के बाद भी गालियाँ ही खाऊंगा , कांग्रेसी, पाकिस्तानी , देशद्रोही ,प्रमाण पत्र दिया जायेगा मुझे |
लेकिन मुझे एक पैसे का अफ़सोस नहीं है , क्यों मैं देश के सुतिये लोगो का बौद्धिक स्तर अच्छे से जानता हूँ जिस नेहरु और गाँधी का सत्य जानने और पचाने में देश के लोगो को 70 साल लग गये इसके बाद भी इनके बहुत से चेले चपाटे आज भी नजर आ जाते है ,ऐसी मानसकिता के लोग संघ को अगले 200 सालो तक नहीं समझ पाएंगे,
पूरी 2000 पन्ने की एक किताब है जो एक व्यक्ति ने लिखी है उसके जीवन भर की रिसर्च है सालों उसने ख़ोज में लगा दिए उस किताब में बहुत ही विस्तार से समझाया गया है की कैसे एक समय में यहूदी भागते हुए भारत आये , और किस प्रकार से आधे यहूदी महाराष्ट्र के चितपावन ब्राह्मणों में घुसे और बाकि मोद और गुप्त जाति में घुस गये,इन्ही जातियों में इन्होने अपना कब्ज़ा कर इन्ही के वंशज कहलाने लगे , ,बाद में यही मोद अपने को मोदी लिखने लगे ,वरना 500 साल पहले के इतिहास में कोई मोदी जाति नहीं है मिलेगी भारत में ,
गाँधी को भारत लाने वाले , गोखले चितपावन ब्राह्मण (यहूदी खून के थे ) ताकि बालगंगाधर तिलक , के आंदोलन को कमजोर किया जा सके ,संघ संस्थापक और इनके अन्य लोग चितपावन ब्राह्मणों में घुसे यहूदियों के ही वंशज है ,
आज संघ का हिडन एजेंडा हिन्दुओ का ठेकेदार बनकर मूल ब्राह्मणों को जड़ से ख़त्म करना है ,क्योंकि वास्तविक ब्राह्मण ही इनकी चालों को अच्छे से समझता है, और राष्ट्र के लिए कुछ करने का साहस रखता है इसलिए अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देकर ये शुद्ध DNA वाले ब्राह्मणों को खत्म करना की साजिशे रची जा रही है , , अम्बेडकरवादी भी जो आज एक धुन में ब्राह्मणों के विरुद्ध आवाज उठाये बैठे है , अंदर से इन्हें संघ ही बढ़ावा दे रहा है ,|
ये सब बातें सोशल मीडिया में इल्मुनिती विरोधी गैंग द्वारा बनाई गई होती तो शायद विश्वास न करता , क्योंकि ये गैग अतिवादी हो गया था , इन्होने तो सावरकर जी को एक समय राष्ट्रद्रोही घोषित कर दिया था ,
इनकी हालत ये हो गई थी , किसी को लूस मोशन लगे हो तो ये इल्मुनिती का हाथ बता देते थे ,
लेकिन इनके अतिवादी होने का अर्थ ये भी नहीं की हम ये मान ले की दुनिया और भारत की लूट में यहूदी बिलकुल शामिल ही नहीं है , उस किताब में बताए व्यक्ति के तर्कों को कोई काट नहीं सकता , ऐसे अनेको उदाहरण उसने दिए , कभी इस पर एक अलग से लेख लिखेंगे ,
जानता हूँ बहुत लोगो को मेरी बातों पर विश्वास नहीं होगा , इसलिए ऊपर पहले ही लिख दिया 70 साल तुम्हें नेहरु गाँधी को समझने में लग गये , संघ को न समझ पाओ गये |
खैर काशी का वास्तविक सत्य तुम लोगो के आगे रख दिया है , अब जो इच्छा को सो करो, कोई खास अपेक्षा किसी से नहीं है , जो अपना दायित्व समझता होगा , उसे कुछ कहने की जरूरत नहीं , और जो नहीं समझता उसे भी कुछ कहने से लाभ नहीं ,|
हर हर महादेव |

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