1. तक्दीर ने ये कह कर बड़ी तसल्ली दी मुझे …….. वो लोग तेरे काबिल ही नहीं थे, जिन्हें दूर किया मैने

  2. बहुत बदनाम हो जाता यहाँ मेरा मुकद्दर, किसी की बद्दुआ ने लग के मेरी लाज रख ली…..यूँ तो तल्ख़ था बेहद दर्द नाकामियों का…पर इनको तेरी निशानी समझ कर अपने साथ रख ली..

  3. मँज़िले बड़ी ज़िद्दी होती हैँ, हासिल कहाँ नसीब से होती हैं ..! मगर वहाँ तूफ़ां भी हार जाते हैं, जहाँ कश्तियाँ ज़िद पर होती हैँ..!!

  4. ऐसा नहीं की दिल में उनकी तस्वीर नहीं थी …मगर करते भी तो क्या जब हाथ में उनके नाम की लकीर ही नहीं थी

  5. इस कदर नफरत है उसे मेरी मोहब्बत से, हाथ अपने जला लिए मेरी तकदीर मिटाने के लिए।

  6. न जाने किसके हाथ हैं किस्मत के फैसले बढ़ती ही जा रहीं हैं राहों की मुश्किलें सजदा करें तो किसके दर पर करें बताकब तक रहेंगे कायम इस दिल के हौसले

  7. नेकी और शराफत भी बेकार हो गए मेहनत के पसीने भी बेजार हो गए काटों भरी हैं राहें मंजिल भी लापता तकदीर लिखनेवाले अपना पता बता

  8. एक सपने की तरह तुझे सजा के रखूं, चाँदनी रात की नज़रों से छूपा के रखूं. मेरी तक़दीरमें तुम्हारा साथ नही, वरना सारी उमर तुझे अपना बना के रखूं!!

  9. झूठ के रंगों से तस्वीर कहां बनती है झूठे ख्वाबों से तकदीर कहां बनती हैतपा खुदको बना सख्ती का सितमगरकच्चे लोहे की शमशीर कहां बनती है

  10. क्यूं हथेली की लकीरों से आगे हैं उंगलियाँ?? क्युंकि रब ने भी किस्मत से आगे आपकी मेहनत रखी हैं…

  11. सच्ची मोहब्बत मिलना भी तकदीर होती है, बहुत कम लोगों के हाथों में ये लकीर होती है.

  12. कभी किस्मत, कभी वक़्त पर इल्ज़ाम.. कभी गलती सितारों की तो कभी दूसरों का नाम…कितने पर्दे हाज़िर हैं यहां ख़ुद को छुपाने के लिए..!

  13. दिल ने फिर चाहा उजाले का समुंदर होना, फिर अमावस को मिला मेरा मुकद्दर होना.

  14. किस्मत को खराब बोलने वालों, कभी किसी गरीब के पास बैठकर पूछना जिंदगी क्या है

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