इतिहास के पन्‍ने पलटें तो पाटन सीट में 1952 से लेकर 1989 तक कांग्रेस पार्टी दबदबा कायम रहा. लेकिन अब हालात एकदम बदल गए हैं. अब ऐसी है स्थिति जानिए पूरा हाल.
पाटन कपड़ा उद्योग के लिए जाना जाता है और यहां की साड़ियां देश-विदेश में सप्‍लाई होती हैं. पाटन सिल्‍क और पाटन कॉटन के कपड़े दुनिया भर में मशहूर हैं. पाटन में लोकसभा चुनाव के लिए 23 अप्रैल यानी तीसरे चरण में वोट डाले गए. यह सीट बनासकांठा और मेहसाणा से घिरी है. साबरकांठा और सुरेंद्रनगर सीट की सीमा पाटन से छूती है. यहां रानी की बाव, हिन्दू और जैन मंदिर हैं. अहमदाबाद से पाटन की दूरी 125 किमी है.
कौन हैं प्रत्याशी
पाटन में कांग्रेस ने जगदीश ठाकोर को टिकट दिया है तो वहीं बीजेपी ने भारत सिंह दाभी को प्रत्याशी बनाया है. इस सीट पर एनसीपी ने भी अपना उम्मीदवार उतारा है. एनसीपी ने कीर्तिभाई चौधरी को टिकट दिया है. राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण पाटन सीट से फिलहाल भारतीय जनता पार्टी के लीलाधर वाघेला सांसद हैं.
पिछले चुनाव का हाल 2014 के लोकसभा चुनाव में लीलाधर भाई खोडाजी वाघेला ने कांग्रेस नेता राठौड़ भावसिंहभाई दयाभाई को 1,38,719 वोटों के अंतर से हराया था. लीलाधर वाघेला गुजरात के वयोवृद्ध नेताओं में शुमार किए जाते हैं. उनकी उम्र 83 साल है. लीलाधर वाघेला का गुजरात विधानसभा की राजनीति में बड़ा दखल रहा है. 1990 में वह गुजरात सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे. इसके बाद भी वह मंत्री बनते रहे. 2014 में लीलाधर वाघेला ने विधायक पद छोड़कर सांसद का चुनाव लड़ा और पहली बार सांसद निर्वाचित हुए.
 इतिहास के पन्‍ने पलटें तो पाटन सीट में 1952 से लेकर 1989 तक कांग्रेस पार्टी दबदबा कायम रहा. हालांकि बीच-बीच में स्‍वतंत्र पार्टी और जनता दल के खाते में भी यह सीट गई. 1980 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार रंछोड़दास परमार ने चुनाव जीता. 1984 में कांग्रेस को यहां से जीत मिली. 1989 में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई और इस चुनाव में जनता दल के खेमचंद चावड़ा ने चुनाव जीता.
1991 के आम चुनाव में इस सीट पर पहली बार बीजेपी को जीत मिली, जब महेश कनोडिया ने चुनाव जीता. इसके बाद 1996 और 1998 के चुनाव में भी यह सीट बीजेपी के नाम हुई. कांग्रेस ने फिर वापसी की और 1999 के चुनाव में महेश कनोडिया को हराकर प्रवीण सोमाभाई राष्ट्रपाल ने चुनाव जीता. 2004 में कनोडिया और बीजेपी ने वापसी की. 2009 में कांग्रेस के जगदीश ठाकोर यहां से सांसद बनें.
पाटन सीट पर 88 प्रतिशत मतदाता हिन्‍दू हैं जबकि 11 प्रतिशत मुसलमान. 2014 के चुनावों में 16,28,641 मतदाताओं का नाम सूची में था. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं. इस इलाके में जिग्नेश मेवाणी के रूप में एक नए नेता सामने आए, जिन्होंने दलितों की आवाज उठाते हुए आरएसएस और बीजेपी को टारगेट किया है. चुनाव में जिग्नेश मेवाणी के प्रचार का क्या असर पड़ता है, इस पर भी नजर रहेगी.
पाटन लोकसभा क्षेत्र के अधीन वडगाम, चाणास्मा, खेरालू, कांकरेज, पाटन, राधनपुर और सिद्धपुर है. 2017 के विधानसभा चुनाव में राधनपुर से कांग्रेस, चाणस्मा से बीजेपी, पाटन से कांग्रेस, सिद्धपुर से कांग्रेस, कांकरेज से बीजेपी, खेरालू से बीजेपी और वडगाम से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जिग्नेश मेवाणी ने जीत दर्ज की थी. यानी 3-3 सीट पर कांग्रेस और बीजेपी, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार जीते.

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