जेजेपी का साथ पाकर मनोहरलाल खट्टर फिर बने हरियाणा के मुख्यमंत्री

जेजेपी का साथ पाकर मनोहरलाल खट्टर फिर बने हरियाणा के मुख्यमंत्री
जेजेपी का साथ पाकर मनोहरलाल खट्टर फिर बने हरियाणा के मुख्यमंत्री

बीजेपी और जेजेपी के गठबंधन होने के बाद से ही हरियाणा में सरकार बनने का रास्ता साफ हो गया था। आज हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने एक बार फिर से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। वहीं जननायक जनता पार्टी के प्रमुख दुष्यंत चौटाला ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

ज्ञात हो कि इस बार के चुनाव में बीजेपी सिर्फ 40 सीट पर ही सिमट कर रह गई यानि बहुमत के जरूरी आँकड़ें से मात्र 6 सीट कम । ऐसे में उसको अपनी सहयोगियों की तलाश थी, इसका जरूरत को मात्र 9 महीने पहले बनी जेजेपी ने 10 सीट पर जीत के समर्थन के बाद यहाँ पर अब स्थायी सरकार बन गई।

हालाकिं इससे पहले निर्दलीय विधायकों ने उनको समर्थन देने का ऐलान किया था। इसमें हरियाणा जनहित काँग्रेस प्रमुख गोपाल कांडा ने भी बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया था पर उनके गीतिका शर्मा सुसाइड केस का आरोपी होने के कारण बीजेपी की काफी किरकिरी हुई थी।

मनोहरलाल खट्टर ने 26 अक्टूबर 2014 को हरियाणा के 10वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण किया था। गैर जाट समुदाय से आने वाले खट्टर हरियाणा के पहले मुख्यमंत्री हैं। मनोहर लाल खट्टर 1994 में बीजेपी में शामिल हुए थे जिसके बाद इनको हरियाणा में संगठन महामंत्री बनाया गया था। इसके बाद ये धीरे-धीरे हरियाणा की राजनीति में अपनी पकड़ बनाई और साल 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को को बहुमत हासिल हुआ और मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री बनाया गया। 2014 के विधानसभा चुनाव में मनोहर लाल खट्टर करनाल विधानसभा सीट से चुनाव मैदान में थे और जीत हासिल की थी।

दुष्यंत चौटाला हरियाणा में ताऊ देवीलाल के विरासत के उत्तराधिकारी माना जाता है। किसी ने भी सोचा नहीं था कि मात्र 9 महीने पहले बनीं जेजेपी अपनी मूल पार्टी इनेलो को पछाड़ देगी। दुष्यंत अब जाट समुदाय तथा युवाओं में एक सम्मानित नेता बनकर उभरे हैं। पिछले साल इनेलो में दुष्यंत के पिता अजय चौटाला और चाचा अभय चौटाला के बीच दो फाड़ हो गया था। अजय और अभय पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला के पुत्र हैं। अजय और उनके पिता इनेलो के कार्यकाल में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले में सजा काट रहे हैं। कुछ लोग दुष्यंत को जोखिम उठाने वाला व्यक्ति मानते हैं। उन्होंने इनेलो के उत्तराधिकार को लेकर अपने चाचा अभय के साथ कानूनी लड़ाई में पड़ने की जगह नई पार्टी बनाने का विकल्प चुना था।

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