1. बालकनी से बाहर आकर कर देखो ए-हसीना..मौसम तुम से मेरे दिल की बात कहने आया है..

  2. उस को भला कोई कैसे गुलाब दे,आने से जिसके खुद मौसम ही गुलाबी हो जाये

  3. या अल्लाह हम सब पर अपनी रहमत कि बारिश कर देहमारे गुनाहों को माफ कर दे.

  4. ज़रा ठहरो , बारिश थम जाए तो फिर चले जानाकिसी का तुझ को छू लेना मुझे अच्छा नहीं लगता.

  5. अब कौन घटाओं को, घुमड़ने से रोक पायेगा,ज़ुल्फ़ जो खुल गयी तेरी, लगता है सावन आयेगा.

  6. ये बारिश ये हसीन मौसम और ये हवाये लगता है आज मोहब्बत ने किसी का साथ दिया है.

  7. आज आई बारिश तो याद आया वो जमाना,वो तेरा छत पे रहना और मेरा सडको पे नहाना.

  8. किस को ख़बर थी साँवले बादल बिन बरसे उड़ जाते हैंसावन आया लेकिन अपनी क़िस्मत में बरसात नहीं

  9. बरसात का बादल तो दीवाना है क्या जाने,किस राह से बचना है किस छत को भिगोना है.

  10. अबके बरसात की रुत और भी भड़कीली है,जिस्म से आग निकलती है, क़बा गीली है.

  11. बरसात की भीगी रातों में फिर कोई सुहानी याद आई,कुछ अपना ज़माना याद आया कुछ उनकी जवानी याद आई.

  12. होंठो पे हंसी तो हो मगर,आँखों में बरसात ना आये.

  13. बरसात का मज़ा तेरे गेसू दिखा गए,अक्स आसमान पर जो पड़ा अब्र छा गए.

  14. भला काग़ज़ की इतनी कश्तियाँ हम क्यों बनाते हैं,न वो गलियाँ कहीं हैं अब न वो बारिश का पानी है.

  15. मासूम मोहब्बत का बस इतना फसाना है,कागज़ की हवेली है बारिश का ज़माना है.

  16. गुल तेरा रंग चुरा लाए हैं गुलज़ारों मेंजल रहा हूँ भरी बरसात की बौछारो में.

  17. अभी तो खुश्क़ है मौसम,बारिश हो तो सोचेंगेहमें अपने अरमानों को,किस मिट्टी में बोना है.

  18. मेरे घर की मुफलिसी को देख कर बदनसीबी सर पटकती रह गईऔर एक दिन की मुख़्तसर बारिश के बाद छत कई दिन तक टपकती रही रह गई.

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