1. धर्म वही है जो नाचता हुआ है। जो धर्म हंसी न दे और जो धर्म खुशी-उत्साह न दे, वह धर्म, धर्म नहीं है।

2. कोई प्रबुद्ध कैसे बन सकता है? बन सकता है, क्योंकि वो प्रबुद्ध होता है- उसे बस इस तथ्य को पहचानना होता है.

3. कोई चुनाव मत करिए. जीवन को ऐसे अपनाइए जैसे वो अपनी समग्रता में है.

4. अर्थ मनुष्य द्वारा बनाये गए हैं . और क्योंकि आप लगातार अर्थ जानने में लगे रहते हैं , इसलिए आप अर्थहीन महसूस करने लगते हैं.

5. मानो नहीं, जानो। भागो मत, जागो। जो कुछ है, वह आज अभी और यहीं है।

6. सिर्फ दो बातें याद रखनी हैं : एक ध्यान व दूसरा प्रेम। फिर किसी धर्म की जरूरत नहीं रहती। ध्यान स्वयं के लिए और प्रेम दूसरों के लिए। ध्यान भीतर जाने के लिए और प्रेम बाहर जाने के लिए।

7. तुम्हारे और मेरे में अंतर क्या है? बस एक अंतर है कि मैं अपने ईश्वरत्व को पहचाना हूं और तुम अपने ईश्वरत्व को नहीं पहचानते। मैं जाग गया हूं और तुम गहरी नींद में सोए हो।

8. तुम जहां, जैसे हो, उस सबका कारण तुम्हीं हो। तुम स्वयं को बदल कर इसे बदल सकते हो।

9. मैं तुमसे यह नहीं कहता कि अपनी परिस्थिति को बदल दो। मैं तुमसे कहता हूं कि तुम अपनी मनोदशा को बदल लो। बाजार में रहते हुए भी बाजार का हिस्सा मत बनना। संसार में रहो लेकिन संसार तुम्हें प्रदूषित न करे।

10. मैंने बड़े बड़े काम किए; मैंने अपने लिये घर बनवा लिए और अपने लिये दाख की बारियाँ लगवाईं; मैंने अपने लिये बारियाँ और बाग लगवा लिए, और उनमें भाँति भाँति के फलदाई वृक्ष लगाए। मैंने अपने लिये कुण्ड खुदवा लिए कि उनसे वह वन सींचा जाए जिसमें पौधे लगाए जाते थे। मैंने दास और दासियाँ मोल लीं, और मेरे घर में दास भी उत्पन्न हुए; और जितने मुझसे पहिले यरूशलेम में थे उसने कहीं अधिक गाय-बैल और भेड़- बकरियों का मैं स्वामी था।

 

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