1. भूख ने निचोड़ कर रख दिया है जिन्हेंउनके तो हालात ना पूछो तो अच्छा हैमज़बूरी में जिनकी लाज लगी दांव परक्या लाई सौगात ना पूछो तो अच्छा है

  2. खिलौना समझ कर खेलते जो रिश्तों सेउनके निजी जज्बात ना पूछो तो अच्छा हैबाढ़ के पानी में बह गए छप्पर जिनकेकैसे गुजारी रात ना पूछो तो अच्छा है

  3. गरीबों की औकात ना पूछो तो अच्छा हैइनकी कोई जात ना पूछो तो अच्छा हैचेहरे कई बेनकाब हो जायेंगेऐसी कोई बात ना पूछो तो अच्छा है

  4. वो राम की खिचड़ी भी खाता हैरहीम की खीर भी खाता हैवो भूखा है जनाब उसेकहाँ मजहब समझ आता है

  5. मरहम लगा सको तो किसी गरीब के जख्मों पर लगा देना हकीम बहुत हैं बाजार में अमीरों के इलाज खातिर

  6. जब भी देखता हूँ किसी गरीब को हँसते हुए, यकीनन खुशिओं का ताल्लुक दौलत से नहीं होता

  7. कभी आंसू कभी ख़ुशी बेची हम गरीबों ने बेकसी बेची, चंद सांसे खरीदने के लिए रोज थोड़ी सी जिन्दगी बेची

  8. ये गंदगी तो महल वालों ने फैलाई है साहब, वरना गरीब तो सड़कों से थैलीयाँ तक उठा लेते हैं

  9. वो जिनके हाथ में हर वक्त छाले रहते हैं, आबाद उन्हीं के दम पर महल वाले रहते हैं

  10. अजीब मिठास है मुझ गरीब के खून में भी, जिसे भी मौका मिलता है वो पीता जरुर है

  11. तहजीब की मिसाल गरीबों के घर पे है, दुपट्टा फटा हुआ है मगर उनके सर पे है।

  12. गरीबों को गरीब कर दिया…ऐ सियासत… तूने भी इस दौर में कमाल कर दिया, गरीबों को गरीब अमीरों को माला-माल कर दिया।

  13. गरीबी बन गई तश्हीर का सबब आमिर, जिसे भी देखो हमारी मिसाल देता है।~ आमिर मकनपुरी

  14. जनाजा बहुत भारी था उस गरीब का, शायद सारे अरमान साथ लिए जा रहा था।

  15. यहाँ गरीब को मरने की इसलिए भी जल्दी है साहब, कहीं जिन्दगी की कशमकश में कफ़न महँगा ना हो जाए।

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