Rti-अगर रेल यात्रा में आपका सामान चोरी हो जाए, तो ... ?

*_अगर रेल यात्रा में आपका सामान चोरी हो जाए, तो … ?_*
(ध्यान से पढें)!

*R.T.I. 🚊उपयोगी जानकारी 🚊*

लखनऊ से जबलपुर लौटते वक्त ए.सी. कोच में जबलपुर की एक महिला प्रोफेसर का पर्स चोरी हो गया, जिसमें लाखों के जेवर और रुपए थे। अब तक उस सामान का पता नहीं लग सका है। चोरी गए सामान की कीमत अब रेलवे को देना होगी।

सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश ने रेल यात्रियों को यह सुविधा दिला दी है।इसके लिए पीड़ित यात्री को उपभोक्ता फोरम में रेलवे की सेवा में कमी का मामला दायर करना होगा। Railway Rti

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के मुताबिक रिजर्व कोच में अनाधिकृत व्यक्ति का प्रवेश रोकना टी.टी.ई. की जिम्मेदारी है, और अगर वह इसमें नाकाम रहता है, तो रेलवे सेवा में खामी मानी जाएगी।

कैसे मिला अधिकार: फरवरी 2014 में राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ट्रेन से चोरी गए महिला डॉक्टर के सामान की राशि का भुगतान रेलवे को करने का आदेश दिया। रेलवे ने इस पर दलील दी की “ये मामला रेलवे क्लेम टिब्यूनल में ही सुना जा सकता है।” जबकि यात्री के वकील के मुताबिक टिब्यूनल में सिर्फ रेलवे में बुक पार्सल के मामलों को ही सुना जाता है।
न्यायमूर्ति सी.के. प्रसाद और पिनाकी चंद्र घोष की पीठ ने 17 साल पुराने इस मामले में रेलवे की दलील को खारिज कर दिया और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के फैसले में दखल देने से इंकार कर दिया।

Railway Rti

यह अधिकार यात्रियों के लिए जितना सुविधाजनक है, उतना ही रेलवे और पुलिस के लिए मुश्किल भरा। इसका दूसरा पक्ष यह भी है कि इसकी जानकारी यात्रियों को नहीं है, और न ही इस जानकारी को उन तक पहुंचाने के लिए कोई कारगर कदम उठाए गए हैं।

ट्रेन में चोरी होने के बाद रिपोर्ट दर्ज कराते वक्त पीड़ित को इस बारे में पुलिस द्वारा जानकारी नहीं दी जाती।

हालांकि जबलपुर जी.आर.पी. का कहना है कि 1 अप्रैल, 2014 के बाद यह आदेश जारी हुआ और 6 माह बाद यानि सितम्बर से अब तक एक भी मामले नहीं आए।

6 माह करना होगा इंतजार चोरी गए सामान को तलाशने के लिए जी.आर.पी. के पास 6 माह का वक्त होगा। इस दरमियान यदि पुलिस पीड़ित का सामान नहीं तलाश पाती तो वह उपभोक्ता फोरम जा सकता है|

Railway Rti

इसके लिए एफ.आई.आर. दर्ज कराते समय पुलिस को पीड़ित से उपभोक्ता फोरम फार्म भरवाना होगा।

ओरिजनल कॉपी पीड़ित के पास होगी, और पुलिस कार्बन कॉपी अपने पास रखेगी। एफ.आई.आर. और फार्म ही यात्री का मूल दस्तावेज होगा, जिसके आधार वह केस दर्ज कराएगा।

ये हैं आपके अधिकार यह सुविधा सिर्फ स्लीपर या ए.सी. कोच में रिजर्वेशन कराने वाले यात्रियों के लिए है।

उपभोक्ता फोरम के जानकार एडवोकेट बताते हैं कि रिजर्वेशन के दौरान यात्री से 2 रुपए सुरक्षा शुल्क लिया जाता है। इधर ट्रेन में स्लीपर कोच यात्री को दिया जाता है, जिसके बाद यह तय होता है कि आपने उसे ट्रेन में सोने का अधिकार दिया है और इस दौरान जो भी घटना होती है, उसका जिम्मेदार रेलवे ही होगा। ट्रेन के स्लीपर या एसी कोच में यात्रा करते समय यात्री का सामान चोरी होता है तो शिकायत दर्ज करते वक्त उससे उपभोक्ता फोरम का फार्म भरवाया जाता है। यदि 6 माह तक पुलिस उसका सामान नहीं तलाश पाती तो वह फार्म की कॉपी ले जाकर उपभोक्ता फोरम में मामला दर्ज कर सकता है, जहां पर रेलवे को पीड़ित का हर्जाना देना होगा।

Railway Rti

💥 इसे पढ़ कर सिर्फ अपने तक सीमित मत रखिए, बल्कि इसे आगे बढ़ाइए …💥 Centralised numbers released by Indian Railways for citizen convinience

9760534983 : टीटीई, आरक्षण और भोजन
9760500000 : साफ-सफाई
9760534057 : कोच में समस्या
9760534060 : बिजली से जुड़ी समस्या
9920142151 : इंक्वायरी की समस्या
9760534063 : आरपीएफ एवं सुरक्षा
9760534069 : पेयजल व्यवस्था
9760534073 : चिकित्सा

कृपया पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर कर जन जन तक पहुचाये

Read more:-

Amazing Facts About RSS (Rashtriya Swayamsevek Sangh)

Fact about Michael Jackson, माइकल जैक्सन की ज़िदगी की सच्चाई

Comments

comments

इस ऑफर का लाभ उठाने के लिए अभी क्लिक करे:-
Loading...