भारत को राष्ट्रगान देने वाले गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार
भारत को राष्ट्रगान देने वाले गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार

रबिन्द्र नाथ टैगोर भारत के सबसे प्रसिद्ध शख्श में से एक थे. उन्हें उनके पाठकों के दिमाग और दिलों पर अविस्मरणीय प्रभाव डालने के लिए कवियों का कवि एवं गुरुदेव भी कहा जाता था. रबिन्द्र नाथ टैगोर जी बंगाल की सांस्कृतिक दृष्टि में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे. वे ऐसे भारतीय यहाँ तक कि गैर यूरोपीय व्यक्ति थे जिन्होंने साहित्य में पहला नॉबेल पुरस्कार जीता. वे न सिर्फ एक कवि या लेखक थे बल्कि वे साहित्य के युग का केंद्र थे जिन्हें भारत के सांस्कृतिक राजदूत के रूप में जाना जाता था. ये अपनी कविताओं के साथ – साथ राष्ट्रगान रचियता के रूप में भी जाने जाते हैं.भारत को राष्ट्रगान देने वाले गुरुदेव रबिन्द्रनाथ टैगोर के अनमोल विचार

  1. सिर्फ तर्क करने वाला दिमाग एक ऐसे चाक़ू की तरह है जिसमे सिर्फ ब्लेड है. यह इसका प्रयोग करने वाले के हाथ से खून निकाल देता है.
  2. आयु सोचती है, जवानी करती है.
  3. कट्टरता सच को उन हाथों में सुरक्षित रखने की कोशिश करती है जो उसे मारना चाहते हैं.
  4. पंखुडियां तोड़ कर आप फूल की खूबसूरती नहीं इकठ्ठा करते.
  5. मौत प्रकाश को ख़त्म करना नहीं है; ये सिर्फ दीपक को बुझाना है क्योंकि सुबह हो गयी है
  6. मित्रता की गहराई परिचय की लम्बाई पर निर्भर नहीं करती
  7. किसी बच्चे की शिक्षा अपने ज्ञान तक सीमित मत रखिये, क्योंकि वह किसी और समय में पैदा हुआ है.
  8. मिटटी के बंधन से मुक्ति पेड़ के लिए आज़ादी नहीं है
  9. हर बच्चा इसी सन्देश के साथ आता है कि भगवान अभी तक मनुष्यों से हतोत्साहित नहीं हुआ है.
  10. हर एक कठिनाई जिससे आप मुंह मोड़ लेते हैं,एक भूत बन कर आपकी नीद में बाधा डालेगी.
  11. जो कुछ हमारा है वो हम तक आता है ; यदि हम उसे ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं.
  12. तथ्य कई हैं पर सत्य एक है.
  13. आस्था वो पक्षी है जो सुबह अँधेरा होने पर भी उजाले को महसूस करती है.
  14. मंदिर की गंभीर उदासी से बाहर भागकर बच्चे धूल में बैठते हैं, भगवान् उन्हें खेलता देखते हैं और पुजारी को भूल जाते हैं.
  15. वो जो अच्छाई करने में बहुत ज्यादा व्यस्त है ,स्वयं अच्छा होने के लिए समय नहीं निकाल पाता.
  16. मैं एक आशावादी होने का अपना ही संसकरण बन गया हूँ. यदि मैं एक दरवाजे से नहीं जा पाता तो दुसरे से जाऊंगा- या एक नया दरवाजा बनाऊंगा. वर्तमान चाहे जितना भी अंधकारमय हो कुछ शानदार सामने आएगा.
  17. मैं सोया और स्वप्न देखा कि जीवन आनंद है. मैं जागा और देखा कि जीवन सेवा है. मैंने सेवा की और पाया कि सेवा आनंद है.
  18. यदि आप सभी गलतियों के लिए दरवाजे बंद कर देंगे तो सच बाहर रह जायेगा.
  19. कला में व्यक्ति खुद को उजागर करता है कलाकृति को नहीं.
  20. हम ये प्रार्थना ना करें कि हमारे ऊपर खतरे न आयें, बल्कि ये करें कि हम उनका सामना करने में निडर रहे.
  21. जीवन हमें दिया गया है, हम इसे देकर कमाते हैं.

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