आज सुभाषचंद्र बोस की पूण्यतिथि पर जाने उनका परिचय और उनके अनमोल विचार
आज सुभाषचंद्र बोस की पूण्यतिथि पर जाने उनका परिचय और उनके अनमोल विचार

23 जनवरी 1897 का दिन विश्व इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित है। इस दिन स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक सुभाषचंद्र बोस का जन्म कटक के प्रसिद्ध वकील जानकीनाथ तथा प्रभावतीदेवी के यहां हुआ।उनके पिता ने अंगरेजों के दमनचक्र के विरोध में ‘रायबहादुर’ की उपाधि लौटा दी। इससे सुभाष के मन में अंगरेजों के प्रति कटुता ने घर कर लिया। अब सुभाष अंगरेजों को भारत से खदेड़ने व भारत को स्वतंत्र कराने का आत्मसंकल्प ले, चल पड़े राष्ट्रकर्म की राह पर। आज सुभाषचंद्र बोस की पूण्यतिथि पर जाने उनका परिचय और उनके अनमोल विचार

आईसीएस की परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद सुभाष ने आईसीएस से इस्तीफा दिया। इस बात पर उनके पिता ने उनका मनोबल बढ़ाते हुए कहा- ‘जब तुमने देशसेवा का व्रत ले ही लिया है, तो कभी इस पथ से विचलित मत होना।’आज सुभाषचंद्र बोस की पूण्यतिथि पर जाने उनका परिचय और उनके अनमोल विचार

16 अगस्त 1945 को टोक्यो के लिए निकलने पर ताइहोकु हवाई अड्डे पर नेताजी का विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया और स्वतंत्र भारत की अमरता का जयघोष करने वाला, भारत मां का दुलारा सदा के लिए, राष्ट्रप्रेम की दिव्य ज्योति जलाकर अमर हो गया।

1. तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा।

2. अगर संघर्ष न रहे, किसी भी भय का सामना न करना पड़े तब जीवन का आधा स्वाद ही समाप्त हो जाता है।

3. बिना जोश के आज तक कभी भी महान कार्य नहीं हुए।

4. मैं यह नहीं जानता की इस आजादी के युद्ध में हममे से कौन-कौन बचेगा लेकिन मैं इतना जानता हूँ की आखिर में विजय हमारी ही होनी है।

5. मुझमे जन्मजात प्रतिभा तो नहीं थी, परन्तु कठोर परिश्रम से बचने की प्रवृति मुझमे कभी नहीं रही।

6. इतना तो आप भी मानेंगे, एक न एक दिन तो मैं जेल से अवश्य मुक्त हो जाऊँगा, क्योंकि प्रत्येक दुःख का अंत होना अवश्यम्भावी है।

7. राजनीति का रहस्य है कि आपको स्वंय को सत्य की तुलना में अधिक मजबूत दर्शाना होता हैं।

8. राष्ट्रवाद मानव जाति के, उच्चतम आदर्श सत्य, शिव और सुन्दर से प्रेरित है।

9. यदि हमें कभी झुकना पड़े तो वीरो की भांति झुको।

10.“मध्या भावे गुडं दद्यात” अर्थात जहाँ शहद का अभाव हो वहां गुड से ही शहद का कार्य निकालना चाहिए।

11. समझोतापरस्ती बड़ी अपवित्र वस्तु है।

12. श्रद्धा की कमी ही सारे कष्टों और दुखों की जड़ है।

13. असफलताएं कभी कभी सफलता की स्तम्भ होती हैं।

14. छात्रों का मूल कर्तव्य अपने चरित्र का निर्माण करना है, जो उन्हें भविष्य निर्माण में मदद करेगा।

15. हमारी राह भले ही भयानक और पथरीली हो, हमारी यात्रा चाहे कितनी भी कष्टदायक हो, फिर भी हमें आगे बढ़ना ही है। सफलता का दिन दूर हो सकता है, पर उसका आना अनिवार्य है।

16. जीवन में प्रगति का आशय यह है की शंका संदेह उठते रहें, और उनके समाधान के प्रयास का क्रम चलता रहे।

17. सुबह से पहले अँधेरी घडी अवश्य आती है, बहादुर बनो और संघर्ष जारी रखो, क्योंकि स्वतंत्रता निकट है।

18. कर्म के बंधन को तोडना बहुत कठिन कार्य है।

19. संघर्ष ने मुझे मनुष्य बनाया, मुझमे आत्मविश्वास उत्पन्न हुआ ,जो पहले नहीं था।

20. कष्टों का निसंदेह एक आंतरिक नैतिक मूल्य होता है।

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