महान समाज सुधारक दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार

महान समाज सुधारक दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार
महान समाज सुधारक दयानंद सरस्वती के अनमोल विचार

दयानंद सरस्वती भारत के महान समाज सुधारक, चिंतक और देशभक्त रहे हैं। आजादी की लड़ाई में उनका योगदान अतुलनीय हैं। इनका बचपन का नाम मूलशंकर था। इन्होंने आर्य समाज की स्थापना की जो आज बड़ी संख्या में प्रचलित हैं। आज हम आपको उनके कुछ महान विचारों के बारे में बताने जा रहे हैं..

1. मुझे सत्य का पालन पसंद हैं , बल्कि मैंने औरों को उनके अपने भले के लिए सत्य से प्रेम करने और झूठ को त्यागने के लिए मनाने के लिए अपना कर्तव्य बना लिया हैं। अंतः अधर्म का अंत मेरे जीवन का उद्देश्य हैं।

2. भगवान का ना कोई रूप है ना रंग है। वह अविनाशी और अपार है। जो इस दुनिया में दिखता है वह उसकी महानता का वर्णन करता है।

3. आत्मा के अनेक रूप है , लेकिन उसका अस्तित्व अनेक हैं।

4. किसी का भला करने से बुराई का अंत होता है, सदाचार की प्रथा का आरम्भ करता है, और लोक-कल्याण तथा सभ्यता में योगदान देता है

5. किसी भी प्रकार से प्रार्थना प्रभावी है क्योंकि यह एक क्रिया है। इसलिए, इसका परिणाम होगा। यह इस ब्रह्मांड का नियम है जिसमें हम खुद को पाते हैं।

6. खुद के लिए सामने रखने या याद करने के लिए लोगों की तस्वीर या अन्य तरह से फोटो लेना ठीक है। लेकिन भगवान की फोटो और छवियाँ बनाना गलत हैं।

7. सुख जो है वो सद्गुणों और सही ढंग से अर्जित धन से मिलता है।

8. मोक्ष का दर्द सहने और जन्म-मृत्यु की अधीनता से मुक्ति है, और यह भगवान की अपारता में स्वतंत्रता और प्रसन्नता का जीवन है।

9. धन एक वस्तु है जो ईमानदारी और न्याय से कमाई जाती है. इसका विपरीत है अधर्म का खजाना

10. कोई भी मानव हृदय सहानुभूति से वंचित नहीं है. कोई धर्म उसे सिखा-पढ़ा कर नष्ट नहीं कर सकता. कोई संस्कृति, कोई राष्ट्र कोई राष्ट्रवाद- कोई भी उसे छू नहीं सकता क्योंकि ये सहानुभूति है

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