Tenali Raman ki Hindi Kahaniyan / तेनाली रमन की हिंदी कहानियां

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Tenali Raman ki Hindi Kahaniyan राजगुरु शुरू से ही तेनाली राम से ईर्ष्या रखते थे।  उन्हें जब भी कोई मौका मिलता तो वे तेनाली के खिलाफ राजा कृष्णदेव राय को भड़काने से नहीं चूकते थे।

 

 

 

ऐसे ही एक बार राजा कृष्णदेव राय राजगुरु की बातों में आकर तेनाली को मृत्युदंड की सजा सूना दी थी।  बेचारे तेनाली अपनी बुद्धि के बल पर किसी तरह से मरते – मरते बचे थे।

 

 

 

Tenali Raman ki Hindi Kahaniyan Short

 

 

 

एक दिन तेनाली ने सोचा, ” क्यों ना यह छोटी – छोटी गलतियों पर मृत्यदंड देने के नियम को ही खत्म करा दिया जाए, अगर कोई बड़ा गुनाह हो तो उसके लिए यह सज़ा दी जाए।  ”

 

 

 

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यह सोचकर उन्होंने एक उपाय ढूंढा और राजगुरु के पास जाकर बोले, ” महाशय, नगर में एक बहुत ही सुन्दर नर्तकी आयी हुई है और वह आपके समान किसी महान व्यक्ति से मिलना चाहती है….तो आप ही मिल लीजिये उससे।  वह तो आपकी काफी तारीफ़ भी कर रही थी। ”

 

 

 

राजगुरु ने शरमाते हुए कहा, ” मैं….मैं भला कैसे मिल सकता हूँ ? ”

 

 

 

” अरे आप चिंता मत कीजिये। वह भी यह बात जानती है कि अगर आपको जाते समय किसी ने देख लिया तो आपकी बदनामी हो जायेगी।  इसीलिए उसने कहा है कि आप स्त्री का वेश धारण करके उसके पास जाइये। ” तेनाली ने बड़े ही चालाकी से कहा।

 

 

 

राजगुरु तेनाली की बात मान गए।  उसके बाद तेनाली राजा के पास पहुंचे और उनसे कहा, ” महाराज, नगर में एक बेहद ही खूबसूरत नर्तकी आयी है।  वह आपसे मिलना चाहती है। आपको अवश्य ही जाना चाहिए। ”

 

 

 

राजा भी हिचकिचाए तो तेनाली ने उन्हें भी राजगुरु वाला प्लान समझा दिया और शाम होते ही राजा और राजगुरु साड़ी पहन, स्त्री का रूप धारण, छुपते – छुपाते कर चल पड़े।

 

 

 

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शाम होते ही तेनाली ने उस भवन की सारी बत्तियां बुझा दीं थी, जहां उसने राजा और राजगुरु को बुलाया था। राजगुरु तो नर्तकी से मिलने के लिए बड़े ही उत्सुक थे।  वे राजा से पहले ही कमरे में जाकर बैठ गए।

 

 

 

जैसे ही राजा कमरे में दाखिल हुए तो राजगुरु को पायल की झंकार सुनाई दी।  उन्होंने सोचा नर्तकी आ गयी है।  वे उसका चेहरा देखना चाहते थे, परन्तु अँधेरे के कारण देख नहीं सके।  बेचारे मन मसोसकर बैठ गए और बातचीत शुरू होने की प्रतीक्षा करने लगे।

 

 

 

राजगुरु बड़े ही बेसब्र होते जा रहे थे। जब बेसब्री की इंतहां हो गयी तो उन्होंने कहा, ” प्रिये, तुमने जिसे बुलाया है, मैं वही हूँ।  तुम अपना चेहरा क्यों नहीं दिखा रही हूँ।  मैं तुम्हारा चेहरा देखने के लिए अधीर हुए जा रहा हूँ। ”

 

 

 

 

राजा ने राजगुरु की आवाज पहचान ली।  उन्होंने कहा, ” राजगुरु आप ? आप यहां क्या कर रहे हैं ? ”

 

 

अब तो राजगुरु को पोल खुल गयी।  बोले तो क्या बोले ? हिम्मत करके उन्होंने कहा, ” महाराज, आप यहां क्या कर रहे ?

 

 

 

” मैं…मैं..” राज भी कुछ बोल नहीं पा रहे थे। तभी राजगुरु ने कहा, ” कहीं हमें मुर्ख तो नहीं बनाया जा रहा है।  राजा साहब, आप सच -सच बताइये कि आप नर्तकी से मिलने आये थे। ”

 

 

 

 

इसपर राजा ने सकुचाते हुए कहा, ” ह….हाँ , लेकिन तुम्हे कैसे पता ? ”

 

 

 

” अरे मैं भी उसी से मिलने आया हूँ और मुझे तेनाली ने इस बारे में बताया था।  ” राजगुरु ने कहा।

 

 

” मुझे भी तेनाली ने ही बताया था।  ” राजगुरु ने आश्चर्य से कहा।  उसके बाद वे दोनों उस कमरे से बाहर निकलने का प्रयास किया, परन्तु दरवाजा बाहर से बंद था।

 

 

 

राजा ने गुस्से से कहा, ” तेनाली दरवाजा खोलो।  हमें पता है तुम यहीं कहीं छुपे हो, अगर हम खुद से निकले तो तुम्हे मृत्युदंड दिया जाएगा। ”

 

 

 

” बस महाराज, मैं दरवाजा अवश्य खोल दूंगा, लेकिन आप मुझे वचन दें कि हर छोटी – छोटी बात पर मृत्युदंड की सज़ा देना बंद कर देंगे और मेरी इस गुस्ताख़ी के लिए क्षमा कर देंगे।  ” तेनाली ने कहा।

 

 

 

अब मरता क्या नहीं करता।  बेचारे राजा और राजगुरु फंसे हुए थे और अगर ऐसी हालत में उनकी पोल खुलती है तो उनकी बड़ी बदनामी होगी।  राजा ने राजगुरु की तरफ देखा तो राजगुरु ने तुरंत ही हाँ कह दी।

 

 

 

उसके बाद राजा ने तेनाली को वचन दिया और तेनाली ने दरवाजा खोल दिया और सभी घर चले गए। मित्रों यह Tenali Raman ki Hindi Kahaniyan आपको कैसी लगी जरूर बताएं और Tenali Raman ki Hindi Kahaniyan की तरह की दूसरी कहानी नीचे की लिंक पर क्लिक करें। 

 

 

 

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