Tenaliraman Stories in Hindi Pdf / तेनाली रमन की कहानियां हिंदी में

Tenaliraman -Stories- in- Hindi- Pdf

Tenaliraman Stories in Hindi Pdf बसंत का मौसम था।  हर तरफ खुशियां ही खुशियां छायी हुई थी।  राजा कृष्णदेव राय प्रकृति की इस मनमोहक छटा पर मोहित हो गए थे।  वर बड़े ही प्रसन्न मुद्रा में तेनाली के साथ बाग़ में टहल रहे थे।

 

 

 

उनके मन में विचार आया कि क्यों ना किसी उत्सव के माध्यम से जनता के बीच इस मौसम की खुशियां बांटी जाए।  उन्होंने इस बारे में तेनाली से बात की तो तेनाली ने भी ख़ुशी – ख़ुशी हाँ कह दी।

 

 

 

Tenaliraman Stories in Hindi Pdf Short

 

 

 

 

उसके तुरंत बाद पुरे नगर को साफ़ करवाया गया और रंग-रोगन करवाया गया। उसके बाद सडकों और इमारतों को रोशनी से सजाया गया।  पूरा शहर जगमगा उठा।

 

 

 

यह देखकर राजा बहुत ही खुश हुए और उन्होंने घोषणा करवा दिया कि राष्ट्रीय उत्सव को मनाने के लिए मिठाई की दुकानों पर भी रंगीन मिठाई ही बेचीं जाए।  ”

 

 

 

इसे भी जरूर पढ़ें Tenali Rama Story in Hindi

 

 

 

 

राजा के आदेश के बाद मिठाई बनाने वाले दुकानदार रंग-बिरंगी मिठाई बनाने में व्यस्त हो गए। इधर कई दिनों से तेनाली दरबार में नहीं आ रहे थे तो राजा इससे बड़े ही चिंतित हुए तेनाली को बुलाने के लिए सिपाहियों को भेजा।

 

 

 

 

सिपाहियों ने सूचना दी कि तेनाली घर पर नहीं हैं।  अब तो राजा की चिंता और भी बढ़ गयी।  उन्होंने सिपाहियों से कहा, ” अब तेनाली को और भी अधिक सतर्कता से ढूंढों।  किसी को भी इसकी खबर नहीं लगनी चाहिए। ”

 

 

 

सिपाहियों ने पूरी सतर्कता से तेनाली को ढूढना शुरू कर दिया और कुछ ही दिनों में उन्होंने तेनाली को ढूंढ लिया।  उन्होंने राजा से बारे में बताया कि तेनाली ने कपड़ों की रंगाई की दूकान खोल ली है और जब हमने उन्हें वापस चलने को कहा तो उन्होंने आने से मना कर दिया।

 

 

 

 

राजा ने इसे अपना अपमान समझा और गुस्से से सैनिको से बोले, ” किसी भी कीमत पर तेनाली को हमारे समक्ष उपस्थित करो।  अगर इसके लिए बल का प्रयोग करना पड़े तो वह भी करो। ”

 

 

 

सैनिकों ने राजाज्ञा का पालन किया और तेनाली कको पकड़ कर राजा के समक्ष प्रस्तुत कर दिया। राजा ने गुस्से से तेनाली से कहा, ” तेनाली यह तुमने रंगरेज की दूकान क्यों खोली है और जब हमने तुम्हे बुलावा भेजा तो तुमने शाही आदेश का अपमान क्यों किया ?

 

 

 

इसपर तेनाली ने कहा, ” महाराज, बात यह है कि मैं राष्ट्रीय उत्सव के लिए अपने वस्त्रों को रंगना चाहता था।  इसके पहले कि सारे रंग ख़त्म हो जाए, मैं रंगाई का कार्य पूर्ण कर लेना चाहता था। ”

 

 

 

“सभी रंगों के प्रयोग से तुम्हारा क्या तात्पर्य है? क्या सभी अपने वस्त्रों को रंग रहे हैं?” राजा ने पूछा।

 

 

 

” नहीं महाराज, ऐसा नहीं है।  दरअसल आपने जो मिठाइयों को रंगने का आदेश दिया है तो मिठाई बनाने वाले दुकानदार बहुत अधिक मात्रा में रंग खरीदने लगे हैं, ऐसे अगर सारे रंग ख़त्म हो गए तो कपड़ों का रंगरोगन नहीं हो पायेगा।  इसीलिए मैं कपड़ों को रंग रहा था। ‘

 

 

 

 

अब राजा को अपनी गलती का एहसास हो गया।  उन्होंने कहा, ” तुम यह कहना चाहते हो कि मेरे आदेश का अनुचित लाभ उठाते हुए मिठाई के दुकानदार हानिकारक रंगों से मिठाइयों को रंग रहे हैं, जबकि उन्हें खाने योग्य रंगों का ही इस्तेमाल करना चाहिए। ”

 

 

 

 

तेनाली ने मुस्कुराते हुए कहा, ” जी महाराज। ‘

 

 

 

राजा ने तुरंत ही मत्रिमंडल की बैठक बुलाई और आदेश दिया कि जो भी मिठाई बनाने वाले दुकानदार हानिकारक रंगों का प्रयोग कर रहे हैं, उनपर कठोर कार्रवाही की जाए। ”

 

 

इस प्रकार तेनाली राम ने अपनी बुध्दि के प्रयोग से एक बार फिर विजयनगर के लोगों की रक्षा की।

 

 

 

मित्रों यह Tenaliraman Stories in Hindi Pdf Writing आपको कैसी लगी जरूर बताएं और इस तरह की दूसरी कहानी के लिए इस ब्लॉग को सब्स्क्राइब भी जरूर करें और दूसरी कहानी नीचे की लिंक पर पर जरूर पढ़ें।

 

 

 

 

1-Akbar Birbal Story in Hindi

2- पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाला कश्मीर होगा भारत का हिस्सा, अब गूगल मेप ने अक्साइ चीन और पीओके ने भारत के हिस्से के रूप में किया शामिल

 

 


Comments

comments