उर्दू के मशहूर शायर अमीर मीनाई के शानदार शेर
उर्दू के मशहूर शायर अमीर मीनाई के शानदार शेर

अमीर मीनाई उर्दू के बड़े शायरों में नाम लिया जाते है. उनकी शायरी युवाओं से लेकर बुजुर्गो तक में फेमस है. उनकी शायरी में दर्द से लेकर जिन्दगी जीने तक की तस्सली है..

  1. कश्तियाँ सब की किनारे पे पहुँच जाती हैं
    नाख़ुदा जिन का नहीं उन का ख़ुदा होता है
  2. उल्फ़त में बराबर है वफ़ा हो कि जफ़ा हो
    हर बात में लज़्ज़त है अगर दिल में मज़ा हो
  3. कौन सी जा है जहाँ जल्वा-ए-माशूक़ नहीं
    शौक़-ए-दीदार अगर है तो नज़र पैदा कर
  4. आफ़त तो है वो नाज़ भी अंदाज़ भी लेकिन
    मरता हूँ मैं जिस पर वो अदा और ही कुछ है
  5. गाहे गाहे की मुलाक़ात ही अच्छी है ‘अमीर’
    क़द्र खो देता है हर रोज़ का आना जाना
  6. तीर खाने की हवस है तो जिगर पैदा कर
    सरफ़रोशी की तमन्ना है तो सर पैदा कर
  7. ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम ‘अमीर’
    सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है
  8. तुम को आता है प्यार पर ग़ुस्सा
    मुझ को ग़ुस्से पे प्यार आता है
  9. वस्ल का दिन और इतना मुख़्तसर
    दिन गिने जाते थे इस दिन के लिए
  10. हुए नामवर बे-निशाँ कैसे कैसे
    ज़मीं खा गई आसमाँ कैसे कैसे
  11. अभी आए अभी जाते हो जल्दी क्या है दम ले लो
    न छेड़ूँगा मैं जैसी चाहे तुम मुझ से क़सम ले लो
  12. हँस के फ़रमाते हैं वो देख के हालत मेरी
    क्यूँ तुम आसान समझते थे मोहब्बत मेरी
  13. माँग लूँ तुझ से तुझी को कि सभी कुछ मिल जाए
    सौ सवालों से यही एक सवाल अच्छा है
  14. आँखें दिखलाते हो जोबन तो दिखाओ साहब
    वो अलग बाँध के रक्खा है जो माल अच्छा है
  15. ‘अमीर’ अब हिचकियाँ आने लगी हैं
    कहीं मैं याद फ़रमाया गया हूँ
  16. फ़िराक़-ए-यार ने बेचैन मुझ को रात भर रक्खा
    कभी तकिया इधर रक्खा कभी तकिया उधर रक्खा
  17. आहों से सोज़-ए-इश्क़ मिटाया न जाएगा
    फूँकों से ये चराग़ बुझाया न जाएगा
  18. किसी रईस की महफ़िल का ज़िक्र ही क्या है
    ख़ुदा के घर भी न जाएँगे बिन बुलाए हुए
  19. फिर बैठे बैठे वादा-ए-वस्ल उस ने कर लिया
    फिर उठ खड़ा हुआ वही रोग इंतिज़ार का
  20. हटाओ आइना उम्मीद-वार हम भी हैं
    तुम्हारे देखने वालों में यार हम भी हैं

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