2018 में बौद्ध धर्म से जुड़ी इमारतों को क्षतिग्रस्‍त कर सुर्खियों में आए संगठन पर बम धमाके करने का शक जताया गया है। श्रीलंका में जो धमाके हुए, उसके पीछे ‘नेशनल तौहीद जमात’ नाम के संगठन का नाम आ रहा है। श्रीलंका के पुलिस प्रमुख ने 10 दिन पहले ही रिपोर्ट दी थी कि आत्मघाती हमलावर देश के गिरिजाघरों पर हमले की तैयारी कर रहे थे। एक विदेशी खुफिया एजंसी ने जानकारी दी है कि यह संगठन कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग पर हमले करने की फिराक में भी था। जनवरी में श्रीलंकाई पुलिस ने चार लोगों के पास से विस्फोटक पदार्थ भी बरामद किए थे।
क्या है ‘नेशनल तौहीद जमात’?
‘नेशनल तौहीद जमात’ यानी NTJ, श्रीलंका का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन है।
ईस्टर के पवित्र त्यौहार के दिन श्रीलंका बम धमाकों से दहल उठा. शवों की गिनती और घायलों को इलाज देने के बीच अनुमान लगाया जा रहा है कि ऐसी नृशंस वारदात के पीछे किसका हाथ रहा है?
श्रीलंका की राजधानी कोलंबो ईस्टर के मौके पर सीरियल बम धमाकों से दहल उठी. आठ धमाकों से फैली विभीषिका का अंदाज़ा इसी बात से लग सकता है कि घटना के दो घंटे के भीतर ही सौ लोगों के मरने की खबर आने लगी. बम धमाकों में चौंकाने वाली बात ये रही कि निशाने पर तीन अहम चर्च और तीन फाइव स्टार होटल थे. धमाके में कोलंबो का एक चर्च और तीन फाइव स्टार होटल प्रभावित हुए तो वहीं राजधानी से बाहर नेगोंबा कस्बे के चर्च को भी निशाना बनाया गया
श्रीलंका के पूर्वी हिस्से में स्थित बेट्टिकेलोआ के चर्च में भी धमाका हुआ.
सरकार ने तुरंत कोलंबो पुलिस की छुट्टियां रद्द करके सेना को सुरक्षा व्यवस्था संभालने के लिए बुला लिया. वहीं श्रीलंकाई प्रधानमंत्री विदेशी दौरे के बीच से लौटकर आपात बैठक में जुट गए.
तमाम ऊहापोह के बीच अंदाज़ा लगाया जा रहा है कि इन बम धमाकों के पीछे कौन सा संगठन है या जिसने भी ये किया उसका क्या उद्देश्य था? फिलहाल किसी ने भी इन धमाकों की ज़िम्मेदारी नहीं ली है.
दुनिया भर में मुस्लिम आतंकी संगठनों ने जिस तरह अलग-अलग देशों में वारदातें कीं उससे भी आशंका पुष्ट हो रही है कि चर्चों को निशाना बनाने के पीछे खास वजह है और नया निशाना श्रीलंका बना होगा. पिछले ही साल फ्रांस, मिस्र, ऑस्ट्रेलिया और मोरक्को में गैर मुस्लिमों की हत्याओं के पीछे मुस्लिम आतंकी संगठनों या उनसे प्रेरणा पाने वालों का हाथ मिलता रहा है. ऐसे में बहुत मुमकिन है कि श्रीलंका का ईसाई समुदाय खास तौर पर ईस्टर के दिन निशाने पर लिया गया हो. मामला ईसाइयों से जुड़ा होने की वजह से पश्चिम तक भी मीडिया कवरेज पाएगा ये भी सोचा गया होगा. इसके अलावा पांच सितारा होटल पर धावा बोलकर सुनिश्चित किया गया कि विदेशी भी हमले की ज़द में आएं और संदेश विदेश तक पहुंचे. अगर इसके पीछे कोई आतंकी संगठन ही है तो इसके स्थानीय या अंतर्राष्ट्रीय होने दोनों की संभावना है. IS की लगभग हर जगह मौजूदगी से अब कोई मुकर नहीं सकता. खुद रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी का दावा है कि तौहीद जमात नाम का आतंकी संगठन इसके पीछे है जिसमें खास तौर पर ऐसे लोग सक्रिय हैं जो अशांत मुस्लिमबहुल देशों से भागकर आए शरणार्थी हैं.
LTTE की वापसी- रक्षा विशेषज्ञ कर्नल वीएम थापर के मुताबिक दस साल पहले जिस लिट्टे के खात्मे का दावा किया जा रहा था ये घटना उसकी वापसी की दस्तक भी हो सकती है. खुद पिछले साल श्रीलंकाई राष्ट्रपति सिरीसेना ने कहा था कि तमिल अलगाववादी उनके देश से बाहर अब भी सक्रिय हैं और एकत्र होने की कोशिश में हैं. सिरीसेना ने माना था कि भले ही लिट्टे को खत्म हो गया हो लेकिन उसकी विचारधारा ज़िंदा है. ज़ाहिर है, श्रीलंका की खुफिया एजेंसियां लगातार सरकार को इनपुट देती रही हैं कि लिट्टे फिर से खड़े होने की कोशिश में है. इसके इतर अगर देखें तो लिट्टे अपने सक्रिय काल में पूजास्थलों और होटलों पर भी हमले करता रहा है. उसकी कोशिश अंतर्राष्ट्रीय मीडिया में प्रचार पाने की भी रही है.

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