Udit Narayan, indiandiary

नवाजउद्दीन नहीं, Udit Narayan ने किया है बॉलीवुड में सबसे ज्यादा संघर्ष:-

 

                                    कई दशक पहले की बात है। नेपाल के एक स्कूल में एक लड़का पढ़ा करता था। उसकी आवाज बेहद सुरीली थी और जब भी दोस्त इकट्ठा होते, तो उससे कोई गीत सुनाने की जिद करते। गीत सुन कर लोग वाह-वाही किये बगैर नहीं रह पाते। धीरे-धीरे उस लड़के को अपनी इस प्रतिभा का एहसास हुआ और उसने ठाना कि वह संगीत की विधिवत ट्रेनिंग लेगा।

लेकिन, गरीब किसान पिता के पास ऐसी कोई विरासत नहीं थी, जिसके बलबूते ऐसा कुछ हो पाता। उस समय मोहम्मद रफी और किशोर कुमार का जमाना था। लड़का कभी-कभी पिता और दोस्तों से कहता कि उसे भी मुंबई जाकर संगीत में अपना नाम कमाना है, तो पिता मुस्कराते हुए कहते कि तुमको तो डॉक्टर या इंजीनियर ही बनना है, शौक के तौर पर तुम गाते रहो। लेकिन लड़के के दिमाग में कुछ और ही था।

 

मैट्रिक की पढ़ाई पूरी कर वह अपनी यात्रा पर निकल पड़ा। यह एक ऐसी यात्रा थी, जिसका न कोई ठिकाना था और न ही कोई निश्चित पड़ाव। बिहार से वह नेपाल पहुंचा और वहां छोटे-मोटे संगीत कार्यक्रम में भाग लेने लगा। तभी उसे भारतीय दूतावास में संगीत समारोह में गाने का अवसर मिला। वहां भी उसे वाहवाही मिलती रही।
धीरे-धीरे नेपाल आये आठ वर्ष गुजर गये, लेकिन आगे का रास्ता पूरी तरह धुंधला था। तभी लड़के को मुंबई के एक संगीत विद्यालय से छात्रवृति मिल गयी और वह मुंबई पहुंचा। फिर, 4-5 वर्ष गुजर गये, पर प्रशिक्षण के अतिरिक्त कुछ और हासिल नहीं हुआ। लेकिन, अभी भी उसकी हिम्मत ने जवाब नहीं दिया था। उस दौर में मोबाइल और इंटरनेट नहीं था, इसलिए लोगों से स्वयं जा-जाकर संपर्क करना पड़ता था। अब इस लड़के ने रोज सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक विभिन्न स्टूडियो और संगीतकारों के चक्कर काटने शुरू किये। फिर 6-7 वर्ष निकल गये, लेकिन अब तक कोई फायदा सामने नजर नहीं आ रहा था।

Udit Narayan

 

 

वह संगीतकारों के पास जाता और केवल एक ही बात कहता, आप मेरा गीत सुन लीजिये, यदि आपको पसंद नहीं आया, तो मैं फिर आपको तंग करने कभी नहीं आऊंगा। जब संगीतकार उसका गीत सुनते, तो वे भी वाहवाही किये बगैर नहीं रहते, लेकिन काम को लेकर कुछ नहीं बोलते। फिर, एक दिन आया कि एक बार उसे उस समय के चोटी के संगीतकार राजेश रौशन ने अपनी एक फिल्म के एक गाने की कुछ पंक्ति गाने का अवसर दिया। फिल्म नहीं चली, लेकिन संगीतकार उसके कायल जरूर हो गये। छोट-मोटे काम मिलने लगे लेकिन कोई पहचान नहीं बन पा रही थी। ऐसे ही 4-5  वर्ष और बीत गये। इस तरह सारी प्रतिभा होते हुए भी कुल मिला कर लगभग 15-16 वर्ष गुजरे। अब हिम्मत जवाब देने लगी थी।
तभी निर्माता नाजिर हुसैन अपने बेटे को लेकर एक नयी फिल्म बना रहे थे, जिसके लिए इस लड़के को उन्होंने गाने का अवसर दिया। फिल्म रिलीज हुई और पहले दो सप्ताह तक बुरी तरह फ्लाप हो गयी। लेकिन, तीसरे सप्ताह से फिल्म ने एक नया इतिहास रच दिया। इस लड़के की रातोंरात जिंदगी बदल गयी और अपनी फिल्मों में गीत गवाने के लिए उसके यहां निर्माताओं की लाइन लग गयी।

Udit Narayan

 

एक पत्रकार ने उससे पूछा किआपकी success का राज क्या है, तो उसने कहा, सफलता का समय सुनिश्चित है, अब यह आप पर निर्भर है कि आप अपने प्रयास पर कब तक कायम रहते हैं।

आज की कहानी के नायक कोई और नहीं,बल्कि प्रसिद्ध गायक उदित नारायण हैं और जिस फिल्म ने उनको पहचान दी, वह फिल्म थी ‘कयामत से कयामत तक’, जिसके बाद उन्होंने कभी भी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

यह सब बात मैं 2017 एक लाइव म्यूजिक शो में सुन और देख रहा था उस व्यक्ति से, आगे आँखों में आंसू लिए वह कहता रहा कि, वह कई बार गोरेगांव और अँधेरी स्टेशन पर भी सोया, पैसे न होने के कारण उसको 37 बार मुंबई लोकल ट्रेन के TTE ने पकड़ा, कई बार मजबूर होकर छोड़ दिया । उनके सभी साथी जैसे – अल्का याग्निक, सोनू निगम काफी पैसे वाले थे जो खुद की गाड़ियों से आते थे ।

उदित ने नेपाली और हिंदी के अलावा, बहुत सी दूसरी भाषाओ में भी गीत गाए है जिनमे मुख्य रूप से मैथिलि, कन्नड़, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलगु, मलयालम, गढ़वाली, सिन्धी, पंजाबी, ओडिया, असामीज, मणिपुरी, भोजपुरी और बंगाली भाषा का समावेश है। वे तीन राष्ट्रिय फिल्म पुरुष्कार और पाँच फिल्मफेयर पुरुष्कार जीत चुके है। 2001 में नारायण को नेपाल के राजा बिरेन्द्र बीर बिक्रम शाह देव ने प्रबल गोरखा दक्षिण बाहू के पुरुष्कार से सम्मानित किया था। 2009 में नारायण को भारत सरकार ने पद्म श्री और 2016 में भारत सरकार ने उन्हें पद्म भुषण अ पुरुष्कार वार्ड से सम्मानित किया था।

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अब तक वे कुल 36 भाषाओ में 30,000 से भी अधिक गाने गा चुके है।
उदित नारायण झा का जन्म 1 December 1955 को भारदह, सप्तरी, नेपाल में हुआ था। उनके पिता का नाम हरे कृष्णा झा और माता का नाम भुवनेश्वरी देवी था। उनके पिता सप्तरी, नेपाल से और उनकी माता बिहार, भारत से थी। उनके पिता स्वदेशी मैथिलि जातीयता के थे।
आकशवाणी नेपाल से अपने करियर की शुरुवात करके शोहरत की बुलंदियों तक पहुचने वाले बॉलीवुड के प्रसिद्ध पाश्र्वगायक उदित नारायण आज भी अपने गानों से श्रोताओ के दिल पर राज करते है। उदित वह शख्स है जिन्होंने अपनी आवाज़ भर से हिंदी सिनेमा में बहुत से गानों को सजाया है।
सफलता के इस मंत्र को यदि हम भी अपने प्रयास में उतार लें, तो हमें भी सफलता का पर्याय बनने से कोई नहीं रोक सकेगा।

कुछ हिट Songs:-

  • चीज़ बड़ी है मस्त मस्त !!
  • दिल ने ये कहा है दिलसे
  • मेहँदी लगा के रखना
  • परदेसी-परदेसी
  • पाप कहते है बड़ा नाम करेगा
  • ऐसा देश है मेरा
  • ए मेरे हम-सफ़र

और अधिक आप यहाँ सुन सकते है :-

>>>>>>>उदित नारायण सोंग्स <<<<<<<<<

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