क्रिसमस का अर्थ क्या है ? …. और क्रिसमस
को एक्समस (X-mas) क्यों कहा जाता है?…!!!!!

हम लोगों के तो संस्कृत या हिंदी के प्रत्येक शब्द का अर्थ है। क्योंकि सब संस्कृत के मूल धातु से उत्पन्न हुए हैं…!!
क्रिसमस को अगर ईसा के जन्मदिवस के रूप में….
मनाया जाता है तो फिर क्रिसमस में तो जन्मदिन जैसा कोई अर्थ नहीं है और उनके…!!
जन्म को लेकर ईसाई विद्वानों में ही मतभेद हैं…!!
और उनके जन्म को 4 ईसा पूर्व बताते हैं …!!
ठीक है अगर मान लीजिये कि 25 दिसंबर को ही ईसा का जन्म हुआ था तो अपना नया साल एक सप्ताह बाद क्यों …??
फिर तो नये साल की शुरुआत उसी दिन से करनी चाहिए थी ! कोई जवाब नहीं हैं उनके पास। लेकिन हमारे पास है.
…….. एक और प्रश्न कि वो लोग अपना अगला दिन और तिथि रात के 12 बजे
उठकर क्यों बदलते हैं जबकि दिन तो सूर्योदय के बाद होता है…!!

तनिक विचार कीजिये कि #अंग्रेजी में सेप्ट (Sept) 7 के लिए प्रयुक्त होता हैं Oct आठ के लिए Nov नौं के लिये #तथा Dec दस के लिये होता है।
इस तरह से तो सितम्बर को सातवाँ महीना होना चाहिए फिर वो नौंवा महीना क्यों और कैसे ???
इसका #कारण ये है कि 1752 ई0 तक इंग्लैण्ड में मार्च ही पहला महीना हुआ करता था और उसी गणित से 7वां महीना #सितम्बर और दसवां महीना दिसम्बर था।
लेकिन 1752 के बाद जब पहला #महीना जनवरी को बनाया गया तब से…
सारी व्यवस्थाएँ बिगड़ीं।
क्रिसमस को (X-mas) क्यों कहते हैं …. ! “X
जो रोमन लिपि में #दस का संकेत हैं और “mas”
यानी मास, यानी #दसवां महीना….
उस समय दिसम्बर दसवां #महीना था जिस कारण इसका X-mas नाम पड़ा…।।
मार्च पहला महीना होता था तो सोचिये कि हम लोग बसंत जैसे खुशहाल समय जिसमे पेड़-पौधे, फूल पत्ते सारी प्रकृति एक नए रंग में रंग जाती है और अपना नववर्ष मनाती है…!!!
उसे छोड़कर जनवरी जैसे ठण्डे, #कष्टदायी और पतझड़ के मौसम में अपना नया साल मनाकर हम लोग कितने बेवकूफ बनते हैं …..!!
सितम्बर यानी सप्त अम्बर #यानी आकाश का सातवां भाग…… भारतीयों ने आकाश को बारह भागों में बाँट रखा था जिसका सातवा, आठवां, नौवां और…
दसवां भाग के आधार पर ये चारो नाम हैं……!!!
तो अब समझे कि इन चार महीनों का नाम –सेप्टेम्बर, अक्तूबर, नवम्बर और दिसम्बर क्यों है…l
संस्कृत में ७ को सप्त कहा जाता हैं….!!
तो अंग्रेजी में सेप्ट, अष्ट को ओक्ट, दस…..को डेसी…….अंग्रेज लोग “त” का उच्चारण “ट”
और “द” का “ड” करते हैं इसलिए सप्त सेप्ट और दस…
डेश बन गया …..!!!!
“पूरे विश्व को अँधेरी गुफा से #निकालकर सूर्य की रश्मि में भिगोने वाले, पैरों पर घिसटने वालों को ऊँगली पकड़कर चलना सिखाने वाले हम भारतीयों को आज अपने भारतीय होने पर शर्म महसूस होती है।
हम पूजा-पाठ, यज्ञ-हवन, दान-पुण्य कर घी के दिए को जलाकर, बडों का आशीर्वाद लेकर नव वर्ष की शुरुआत करने वाले अपने तर्कसंगत नये साल को छोड़कर अंग्रेजों का नया साल मनाते हैं..…!!!
जिसका कोई आधार ही नहीं है।
एक बात और ………!!
हमारा नया साल उनके अप्रेल के आसपास आता है इसलिये अंग्रेजों ने भारत में अप्रैल फूल बनाना शुरू किया था। क्योंकि उनका उदेश्य भारतीय संस्कृति को तहस नहस करना था ।।

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