लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस ने लखनऊ सीट से आचार्य प्रमोद कृष्‍णम को अपना उम्‍मीदवार घोषित किया है. यहां कृष्‍णम का मुकाबला बीजेपी के प्रत्याशी और वर्तमान में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह और गठबंधन की प्रत्‍याशी पूनम सिन्‍हा से होगा. प्रमोद कृष्‍णम 18 अप्रैल को सुबह 10 बजे नामांकन दाखिल करेंगे.

अपने बयानों के चलते अक्‍सर विवादों में रहने वाले कृष्‍णम पहली बार चुनावों में किस्‍मत नहीं आजमा रहे हैं.बल्कि राजनीति में गहरी रुचि लेने वाले प्रमोद 2014 में भी कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं. कांग्रेस ने इन्‍हें संभल से टिकट दी थी, लेकिन 16034 वोट हासिल कर ये पांचवें स्‍थान पर रहे.

कांग्रेस के स्‍टार प्रचारक के रूप में मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान में प्रचार कर चुके प्रमोद कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा में भी शामिल हुए थे. ये मुस्लिमों के पक्ष में दिए बयानों से भी एक पक्ष के निशाने पर रहते हैं. इतना ही नहीं कांग्रेस के पक्ष में लगातार प्रचार अभियान चलाकर और बयान देकर कांग्रेस के इकलौते संत के रूप में भी पहचान बना चुके हैं.

हालांकि संत परंपरा और कल्कि धाम की स्‍थापना कर कल्कि पीठाधीश्‍वर बने प्रमोद कृष्‍णम को अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने फर्जी बाबाओं की सूची में डाल दिया था. इनके साथ ही चक्रपाणि महाराज के खिलाफ भी फर्जी बाबा का प्रस्‍ताव पास हुआ था. परिषद ने कहा था कि दोनों बाबा किसी संन्यासी परंपरा से नहीं आते हैं. इसके पहले परिषद 17 बाबाओं को फर्जी घोषित कर चुका था.

बयानों के चलते हमेशा चर्चाओं में बने रहने वाले प्रमोद कृष्‍णम योगी, पीएम मोदी और बीजेपी को लेकर लगातार हमलावर रहते हैं. इन्‍होंने सहारनपुर में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था, ‘योगी सरकार एक संत से घबरा गई. उन्हें आशंका है कि सहारनपुर में उनकी हत्या की साजिश रची गई है. बीजेपी को हिंदुओं के खिलाफ बोलने वाले नेता पसंद नहीं हैं. या फिर जो नेता मुस्लिमों के खिलाफ बोलते हैं, भाजपा उन्हें पसंद करती है. मुहब्बत की बात करने वालों को बीजेपी पसंद नहीं करती.

इन्‍होंन पीएम मोदी की तुलना आतंकी संगठन इंडियन मुजाहिद्दीन से की थी. वहीं पीएम के साथ-साथ सांसद साक्षी महाराज और योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा था. इन्होंने कहा था कि देश में लोग जितना इंडियन मुजाहिद्दीन से नहीं डरते हैं, उससे कहीं ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरते हैं. वहीं योगी आदित्यनाथ की तुलना माफिया चलाने वाले नेता से की थी.

लेकिन यही प्रमोद कृष्णम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की अंतिम यात्रा के समय प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा पैदल चलने को लेकर काफी संवेदनशील नजर आए. इस मौके पर प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री मोदी के इस कदम की तारीफ करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि सवाल किसी प्रधानमंत्री के ‘पैदल’ चलने का नहीं है, सवाल एक ‘गुरु’ और ‘शिष्य’ के सम्बंध का है, जिसे आज ‘नरेंद्र’ भाई ने बख़ूबी निभाया.

प्रमोद कृष्‍णम की तरह ही इनकी पीठ भी विवादों में रहती है. कल्कि महोत्‍सव आयोजन के दौरान जब कल्कि धाम के शिलान्यास की तैयारी कर ली गई थी तो तत्‍कालीन मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ने इस शिलान्‍यास पर रोक लगा दी थी. इस आयोजन में शिवपाल यादव, दिग्विजय सिंह जैसे नेता शिलान्‍यास के लिए पहुंचे थे.

आचार्य प्रमोद कृष्‍णम सिर्फ बीजेपी पर ही हमलावर नहीं रहते हैं. बल्कि संत समाज, संत परंपराओं और यहां तक कि जिस कांग्रेस पार्टी से उम्‍मीदवार हैं, उसके अध्‍यक्ष राहुल गांधी के उपवास पर भी सवाल उठा चुके हैं. इन्होंने अपने एक ट्वीट में कहा था कि उपवास एक पवित्र शब्द है जिसका सम्मान हर हाल में होना चाहिए. पेट भर के भोजन करने के बाद उपवास रखना, बड़ा धोखा है.

फिलहाल देखना होगा कि अपने बयानों से हलचल मचाने वाले अध्‍यात्‍म और राजनीति का मिश्रण आचार्य प्रमोद कृष्‍णम लोकसभा चुनाव में अपने प्रति‍द्वंद्वियों से किस प्रकार मुकाबला करते हैं. लखनऊ सीट पर बीजेपी, सपा-बसपा गठबंधन और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय मुकाबला है. तीनों ही अपने आप के मजबूत होने का दावा पेश कर रहे हैं.

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