Zamana Shayari

  1. वो किताबो में दर्ज था ही नहीं,जो पड़ाया सबक जमाने ने।

  2. यहाँ सब कुछ बिकता है दोस्तो रहना जरा सभल के,बेचने वाले हवा भी बेच देते हैंगुब्बारों में डाल के।

  3. ये जमाना जल जायेगा किसी शोले की तरह,जब उसके हाथ में खनकेगा मेरे नाम का कंगन।

  4. रहते हैं अस-पास ही लेकिन साथ नहीं होते,कुछ लोग मुझसे जलते हैंबस ख़ाक नहीं होते।

  5. उँगलियाँ मेरी वफ़ा पर न उठाना लोगो,जिसको शक हो वो मुझे निभा कर देखे।

  6. कभी तो अपने अन्दर भी कमियां ढूंढे,ज़माना मेरे गिरेवान में झाकता क्यों है।

  7. खोटे सिक्के जो अभी अभी चले हैं बाजार में,वो कमियां निकाल रहें हैं मेरे किरदार में।

  8. क़र्ज़ ग़म का चुकाना पड़ा है,रो के भी मुस्कराना पड़ा है,सच को सच कह दिया इसी पर,मेरे पीछे ज़माना पड़ा है।

  9. चीखें भी यहाँ कोई गौर से सुनता नहीं फ़राज़,अरे किस शहर में तुम शेर सुनाने चले आये।

  10. मुझे उचाईओं पर देखकर हैरान हैं बहुत लोग,पर किसी ने मेरे पैरों के छाले नहीं देखे।

  11. जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है,मेरा दिल तोड़कर मुझे हँसाना चाहता है,जाने क्या बात है मेरे चेहरे में,हर शख्स मुझे अजमाना चाहता है।

  12. हमारा जिक्र भी अब जुर्म हो गया है वहाँ,दिनों की बात है महफ़िल की आबरू हम थे,ख्याल था के ये पथराव रोक दे चल कर,जो होश आया तो देखा लहू लहू हम थे।

  13. भूल कर भी अपने दिल की बात किसी से मत कहना,यहाँ कागज भी जरा सी देर में अखबार बन जाता है।

  14. खामोश बैठे तो लोग कहते है उदासी अच्छी नहीं,हंस ले तो लोग मुस्कराने की वजह पूछ लेते हैं।

  15. बे-मतलब की अच्छाई का सिल सिला ख़तम,अब जिस तरह की दुनिया उस तरह के हम।

  16. दुनिया ये मोहब्बत को मोहब्बत नहीं देती,इनाम तो बड़ी चीज़ है कीमत नहीं देती,देने को मैं भी दे सकता हूँ गाली उसे,मगर मेरी तहजीब मुझे इज़ाज़त नहीं देती।

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