एक बेहतरीन गज़ल, Zamane Ki Fitrat, जमाना शायरी

एक बेहतरीन गज़ल, Zamane Ki Fitrat, जमाना शायरी, indiandiary

एक बेहतरीन गज़ल, Zamane Ki Fitrat:-

 

कुछ लोग अपनी बंदगी पर यूँ गुमान करतें हैं,
बंदगी करके जैसे खुदा पे एहसान करतें हैं !

न चाहना किसी को कभी जान से भी ज्यादा, 
ऐसे लोग बाद में बहुत परेशान करतें हैं !!

मुश्किलों का स्वागत हम वैसे ही करतें हैं, 
मेहमानों का स्वागत जैसे मेजबान करतें हैं!

दौलत देख अब रिश्ते बना लेतें हैं लोग, 
चाल चलन पर किसी के कहां ध्यान करतें हैं!!

बुरे दौर में वही लोग गिरेबान पकड़तें है, 
खुशहाली में कुर्बान जो दिल ओ जान करतें हैं!

दौलत जवानी और शोहरत तो चलायमान हैं, 
बहुत पछताते हैं वो लोग जो इनपे मान करते हैं!!

अच्छे से समझ चुका दिल, ज़माने की फितरत,
धोखे ओ फरेब इसे अब कहां हैरान करतें हैं !

दुनिया में आना तो ‘शिवम्’ उनका ही सफल है,
जीवन में जरूरतमंदों का जो कल्याण करतें हैं !!

 zamane ki fitrat

 

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